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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Warning of privilege action over breach of Public Accounts Committee's confidentiality

Delhi NCR News: लोक लेखा समिति की गोपनीयता भंग पर विशेषाधिकार कार्रवाई की चेतावनी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 09:19 PM IST
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60 करोड़ के स्टाफ क्वार्टर मामले की जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने का आरोप, सभापति अजय महावर ने जताई नाराजगी
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कैग की आपत्तियों पर जांच जारी, निर्माण क्षेत्र बढ़ाने से 18.88 करोड़ के अतिरिक्त खर्च समेत कई बिंदुओं पर जवाब मांगा

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
करीब 60 करोड़ रुपये के स्टाफ क्वार्टर निर्माण मामले की जांच को लेकर दिल्ली की सियासत गरमा गई है। लोक लेखा समिति के सभापति अजय महावर ने समिति की गोपनीय कार्यवाही से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने वालों के खिलाफ विशेषाधिकार के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि समिति की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले उसकी कार्यवाही सार्वजनिक करना संसदीय प्रक्रिया की गरिमा को प्रभावित करता है।

महावर के मुताबिक, जांच के दौरान करीब 18 रिकॉर्ड और दस्तावेज की पड़ताल चल रही थी और कैग की आपत्तियों से जुड़े तथ्यों के सत्यापन के लिए सदस्यों को गोपनीय जानकारी दी गई थी। लेकिन राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर सकते हैं, लेकिन लोक लेखा समिति को राजनीतिक विवाद में घसीटना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर गोपनीय विषयों के प्रसार और राजनीतिक इस्तेमाल के प्रयास को विधानसभा अध्यक्ष के सामने विशेषाधिकार के नजरिये से रखा जाएगा।
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कैग की आपत्तियों पर जांच का दावा
समिति सभापति ने साफ किया कि पिछली आप सरकार के दौरान 6 फ्लैग स्टाफ रोड हाउस के स्टाफ क्वार्टर मामले की जांच किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि कैग रिपोर्ट में उठाए गए सवालों के आधार पर हो रही है। कैग ने निर्माण में पुराने दर आधार के इस्तेमाल और लागत निर्धारण पर सवाल उठाए हैं।
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क्षेत्र बढ़ा तो 18.88 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
कैग के मुताबिक निर्माण क्षेत्र करीब 1,397 वर्गमीटर से बढ़ाकर 1,905 वर्गमीटर किया गया। इसके चलते करीब 18.88 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय प्रभाव का सवाल उठा है। सिविल और विद्युत कार्य, मॉड्यूलर किचन समेत दूसरी मदों की लागत भी जांच के दायरे में है। करीब 45.90 लाख रुपये के पर्दों पर हुए खर्च को लेकर भी समिति अनुमति और सक्षम स्वीकृति का आधार तलाश रही है। कैग ने निविदा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज और कार्यवाही की प्रतियां मांगी थीं, जो रिपोर्ट के अनुसार उस समय उपलब्ध नहीं कराई गईं।


स्टाफ ब्लॉक की राशि दूसरी मद में जाने पर सवाल
स्टाफ ब्लॉक के लिए स्वीकृत धनराशि के दूसरे मद में इस्तेमाल किए जाने का मुद्दा भी जांच में है। समिति यह पता करेगी कि धन स्थानांतरित करने की अनुमति किसने दी और भुगतान किस आधार पर किया गया। पुराने क्वार्टरों को ध्वस्त करने, नए निर्माण, ठेकेदारों की पात्रता और भुगतान से जुड़े सवाल भी जांच का हिस्सा हैं।


17 साल बाद रिपोर्ट आने का भी मुद्दा
महावर ने कहा कि वर्ष 2008-09 के बाद करीब 17 साल के अंतराल पर 2025 में लोक लेखा समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गई। उनके मुताबिक पिछले वर्षों के 40 से अधिक लंबित विषय आगे नहीं बढ़ पाए थे। उन्होंने कहा कि समिति किसी दल के लिए नहीं, बल्कि विधानसभा और संसदीय नियमों के प्रति जवाबदेह है।
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