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यहां रोज तय होती है हार-जीत, बनती है रणनीति

Fri, 28 Mar 2014 08:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 28 Mar 2014 08:46 AM IST
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voters started to guess the winning candidate

भले ही कहीं चुनाव की रौनक न दिखाई दे रही हो लेकिन चुनाव का असली रूप तो गांवों में दिखाई देता है। सुबह काम से फुर्सत होते ही चौपाल लग जाती है और हुक्का भरकर गुड़गुड़ाने के साथ-साथ प्रत्याशियों के हार-जीत का फैसला होना शुरू हो जाता है।

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प्रत्याशियों के गुण दोषों पर गरमागरम चर्चा के बीच कौन क्यों जीतेगा, इसका भी तर्क होता है। यहां तक कि कभी-कभी तर्क विचार आपस में टकरा जाते हैं। चौपाल पर बैठे बुजुर्ग उन्हें समझाकर शांत कर देते हैं।
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बीच-बीच में अखबारों में छपी खबरों का जिक्र भी होता है कि फलां प्रत्याशी मजबूत हो गया है। जो प्रत्याशी आगे बढ़ रहे हैं उन्हीं पर अधिक जोर होता है। हाशिए पर आने वाले प्रत्याशियों पर भी बात होती है लेकिन ज्यादा समय तक नहीं।

दरअसल, बसपा प्रत्याशी सतीश अवाना इसी गांव से हैं, इसलिए चर्चा के केंद्र वही ज्यादा हो रहे हैं। ऐसा सिलसिला इन दिनों हर रोज जारी रहता है। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने हरौला गांव का चुनावी जायजा लिया।


वादे तो सबने किये पूरा कौन करेगा?
जमा हो जाता है गंदा पानी: हरौला गांव में नालियां तो बनी हैं लेकिन गंदे पानी के निकासी की व्यवस्था ठीक नहीं है। नालियां अक्सर जाम हो जाती हैं। इससे जगह-जगह गंदा पानी भर जाता है। कई बार ग्रामीण इस दिक्कत को दूर करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक समस्याओं से मुक्ति नहीं मिली है।

बारात घर की चहारदीवारी नहीं: बारात घर बने कई वर्ष हो चुके हैं लेकिन चहारदीवारी नहीं बनाई गई है। इसके चलते उसमें असामाजिक तत्व घुस जाते हैं। साथ ही पशु भी उसको नुकसान पहुंचा रहे हैं।


लगा रहता है जाम:
आसपास मार्केट होने के चलते बड़ी संख्या में वाहन खड़े होते हैं। इससे जाम लग जाता है। लोगों की सुविधा को देखते हुए पार्किंग का टेंडर काफी पहले हो चुका है लेकिन अभी तक निर्माण नही हुआ है।

नहीं मिल रही बुजुर्गों को पेंशन: गांव के कई बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल रही है। हक के लिए लोग विभागों के चक्कर लगाकर थक गए हैं। आश्वासन मिलते हैं लेकिन पेंशन नहीं।

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