ये हैं वीके सिंह कि वे बयान जिनसे खूब हुई उनकी फजीहत
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गाजियाबाद से सांसद और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह हमेशा ही अपने विवादास्पद बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं। अपने बयान को लेकर एक बार फिर केंद्रीय मंत्री विवादों में हैं। उन्होंने कहा है कि देश में असहिष्णुता पर बहस पैसे लेकर शुरू की गई थी।
वीके सिंह के मुताबिक यह बहस कुछ ज्यादा ही कल्पनाशील लोगों के दिमाग की ‘‘गैर-जरूरी’’ उपज थी। जो बिहार चुनाव से पहले राजनीति से प्रेरित थी। इन लोगों को बहुत सा धन दिया जा रहा है। उनके मुताबिक चर्च में हुई छोटी से घटना को बताया जाता है कि चर्च पर हमला हुआ।
हालांकि सुनपेड़ घटना को लेकर मीडिया से बातचीत के दौरान दिए गए कुत्ते वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह को बड़ी राहत मिली है। वीके सिंह के बयान का कोर्ट में दिल्ली सरकार ने बचाव किया है।
सुनपेड़ मामले पर दिया था विवादास्पद बयान
गौरतलब है कि सुनपेड़ में दलित बच्चों को जलाए जाने की घटना पर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने विवादास्पद बयान दे दिया था। वीके सिंह ने कहा था कि केंद्र सरकार का दलित बच्चों की मौत से कुछ लेना-देना नहीं है।
उनके मुताबिक अगर कोई कुत्ते को पत्थर मारे तो सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। वीके सिंह से पूछा गया था कि क्या सुनपेड़ में हुई घटना सरकार की नाकामी है?
इसके जवाब में उन्होंने सुनपेड़ की घटना को दो परिवारों के बीच विवाद बताया था और कहा था कि इसकी जिम्मेदारी पहले प्रशासन की है न कि सरकार की। इसे सरकार से नहीं जोड़ना चाहिए।
कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने किया बचाव
हालांकि बाद में वीके सिंह ने अपने बयान पर माफी भी मांगी थी और कहा था कि अगर उनके बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो वे माफी मांगते हैं। वीके सिंह ने फिर इस घटना को कायरतापूर्ण करार दिया था।
इसी दौरान केंद्रीय मंत्री के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी। जिसपर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को तलब किया था और वीके सिंह के बयान पर रिपोर्ट मांगी थी।
इसके जवाब में दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में उनके बयान का बचाव किया है और कहा है कि केंद्रीय मंत्री का कुत्ते वाला बयान किसी की मानहानि करने वाला या नुकसान पहुंचाने वाला नही है।
इन बयानों पर हो चुकी है फजीहत
भोपाल में विश्व हिंदी सम्मेलन से पहले भी रिटायर्ड जनरल ने कहा था कि पहले के नौ विश्व हिंदी सम्मेलनों में साहित्य और साहित्यकारों पर दबाव होता था।
लोग आते थे, लड़ते थे, आलोचना करते थे और खत्म हो जाता था। इस दौरान लेखक और साहित्यकार खाना खाने के लिए आते थे और शराब पीकर अपनी किताब का पाठ करते थे। लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
साहित्यकारों के पुरस्कार लौटाने पर उन्होंने ऐसा ही बयान दिया था। वीके सिंह ने कहा था कि ये साहित्यकार तब कहां थे, जब सिखों का नरसंहार हुआ था। इन्होंने 20 सालों तक पुरस्कारों का फायदा उठाया और अब लौटा रहे हैं।
एक बयान में उन्होंने यमन से भारतीयों को निकालने की तुलना पाकिस्तान दूतावास के कार्यक्रम में जाने से की थी। इतना ही नहीं इस पर बढ़ते विवाद के बाद उन्होंने मीडिया पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
वीके सिंह ने ट्वीट किया था कि ''दोस्तो, आप प्रेस्टीट्यूट्स से और क्या उम्मीद कर सकते हैं। टीवी एंकर ने ‘ई’ की जगह 'ओ' सोच लिया था।