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Delhi: वायरल के बाद कफ कर रहा दो माह तक परेशान, दवा का भी नहीं हो रहा असर

Fri, 21 Apr 2023 07:43 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Fri, 21 Apr 2023 07:43 AM IST
सार

डॉक्टरों की माने तो फ्लू इन्फलुएंजा वायरस ने अपना रूप बदला है। इस बार यह लोगों को ज्यादा समय तक के लिए बीमार बना रहा है। कई मरीज ऐसे हैं  जिन्हें दो माह तक खांसी हो रही है।

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Viral and flu patients are falling victim to post viral allergy cough
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

विस्तार

मौसम में बदलाव के बाद वायरल और फ्लू के मरीज पोस्ट वायरल एलर्जी कफ के शिकार हो रहे हैं। इससे पीड़ित मरीजों को डेढ़ से दो माह तक खांसी रह रही है। साथ ही शरीर में थकान, सिर में दर्द, अकड़न, सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मरीजों पर दवा का भी असर देखने को नहीं मिल रहा है। खासकर कमजोर इम्युनिटी वाले मरीजों को लंबे समय तक दवाइयां लेने के बाद भी खांसी थम नहीं रही।

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डॉक्टरों की माने तो फ्लू इन्फलुएंजा वायरस ने अपना रूप बदला है। इस बार यह लोगों को ज्यादा समय तक के लिए बीमार बना रहा है। कई मरीज ऐसे हैं  जिन्हें दो माह तक खांसी हो रही है। हालांकि दिल्ली का अधिकतम तापमान 40 डिग्री को पार कर गया है। अभी तक देखा गया है कि मौसम गर्म होने के साथ फ्लू के मामले तेजी से घटते हैं, लेकिन इस बार लगातार मौसम में हुए बदलाव के कारण ऐसा नहीं हुआ। 
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डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रताप ने बताया कि पोस्ट वायरल खांसी वायरल संक्रमण से उबरने के बाद बनी रहती है। यह 3-8 सप्ताह तक चल सकता है। ये खांसी आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती हैं। जिन मरीजों में यह ज्यादा समय तक हैं उन्हें बड़े अस्पताल में जाकर जांच करवानी चाहिए। इनके कारण शरीर में और भी नुकसान हो सकता है।

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करें कोविड नियमों का पालन
फ्लू के मामले कोरोना की तरह ही फैल रहे हैं। ऐसे में इससे बचाव के लिए सख्ती से कोविड नियमों का पालन करना चाहिए। जिन्हें खांसी की शिकायत हैं, उन्हें मास्क अनिवार्य रूप से पहनना चाहिए। इसके अलावा बुखार आने पर खुद को आइसोलेट भी करना चाहिए जिससे दूसरों तक बीमारी न फैले।

खुद न लें दवा
डॉ. प्रताप का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक खांसी हैं तो खुद से दवा न लें। कई बार लोग काढ़ा या अन्य गर्म तासीर वाली वस्तु का सेवन करते हैं जो नुकसान पहुंचा सकता है। अभी मौसम गर्म हैं, ऐसे में शरीर में किसी भी तरह से पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। यदि खांसी और बुखार थम नहीं रहा तो डॉक्टर मरीज की हालत को देखते हुए स्टेरॉयड युक्त हेवी दवाओं को दे सकते हैं, जिससे खांसी ठीक हो सकती है।

दूसरी बीमारियों का खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि यदि खांसी एक माह से अधिक समय तक हैं तो बड़े अस्पताल में जाकर पूरी जांच करवानी चाहिए। कई बार खांसी दूसरी बीमारी का रूप भी ले सकती है जिसे हम सामान्य खांसी मानते हैं। यह एक व्यक्ति से दूसरे को भी फैल सकती है। ऐसे में संक्रमित लोगों को जांच करवा उचित उपचार करवाना चाहिए।

अस्पतालों में बढ़े कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीज
दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ने के साथ अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कुल कोरोना मरीजों में से 12 फीसदी से अधिक मरीज काफी गंभीर हैं, जिन्हें आईसीयू के साथ वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया है। वहीं, एक तिहाई मरीज आईसीयू में हैं।  

दिल्ली सरकार के कोरोना एप के अनुसार बृहस्पतिवार शाम पांच बजे तक 390 गंभीर मरीज हैं। इनमें से 373 ऑक्सीजन सपोर्ट पर, 126 आईसीयू में और 47 आईसीयू के साथ वेंटिलेटर पर हैं। डॉक्टरों की माने तो दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कोरोना के गंभीर मरीज अन्य बीमारी से भी पीड़ित हैं। इनमें से ज्यादातर मरीज पहले अन्य बीमारियों का इलाज करवा रहे थे, बाद में कोरोना संक्रमण से उनकी समस्या और विकराल हो गई। 

दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक एक अप्रैल से 19 अप्रैल तक 49 मरीजों ने कोरोना के कारण दम तोड़ दिया है। इसमें से अधिकतर मरीज की मौत का कारण सीधे कोरोना नहीं था। हार्ट, लंग्स, लीवर, किडनी, डायलिसिस व अन्य के मरीज थे। 

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर प्रताप के मुताबिक कोरोना वायरस भी रूप बदल रहा हैं, जिस कारण ये कोरोना के खिलाफ बने इम्युनिटी को भी तोड़कर संक्रमित कर रहा हैं। हालांकि, इससे सभी को डरने की जरूरत नहीं हैं। जो लोग गंभीर हैं, उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत हैं। 

दिल्ली के कोरोना एप के अनुसार दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में सबसे ज्यादा 13 गंभीर मरीज मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में तीन, सफदरजंग अस्पताल में छह, लेडी हार्डिंग में दो  व अन्य अस्पतालों में गंभीर मरीज भर्ती हैं। दिल्ली में अभी 47 गंभीर मरीज भर्ती हैं।

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