जेएनयू बवाल : एएमयू में कैंडल मार्च, जामिया समन्वय समिति ने की एफआईआर दर्ज कराने की मांग
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) कैंपस में रविवार को छात्रों के दो गुटों में जमकर मारपीट हुई। देर शाम नकाब पहने 40 से 50 युवकों की भीड़ कैंपस में पहुंची और छात्रों, हॉस्टल, वाहनों पर लाठियों व पत्थरों से हमला किया। इस हमले में जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आईषी घोष और महिला शिक्षक सुचित्रा सेन को सिर में गंभीर चोट आई है। वहीं करीब 30 से ज्यादा छात्र और शिक्षक भी घायल हुए हैं।
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लाइव अपडेट
एएमयू में छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च
Jamia Coordination Committee (JCC): We demand that the goons who unleashed terror in Jawaharlal Nehru University (JNU) be identified & a First Information Report (FIR) be initiated immediately against them.
— ANI (@ANI) January 5, 2020
दिल्ली पुलिस का कैंपस में फ्लैग मार्च
जेएनयू हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी कैंपस में फ्लैग मार्च किया। इस दौरान कैंपस के अंदर 'दिल्ली पुलिस, वापस जाओ' के नारे लगे।#WATCH Delhi: 'Delhi police, go back' slogans raised during the flag march conducted by police inside Jawaharlal Nehru University (JNU) campus. pic.twitter.com/w5OYN3DAo0
— ANI (@ANI) January 5, 2020
जेएनयू शिक्षक फेडरेशन ने की घटना की निंदा, कहा- छात्रों को न उकसाएं
घायलों से मिलेगा छात्रों का प्रतिनिधिमंडल
गेटवे ऑफ इंडिया पर जुटे छात्र-छात्राएं
Mumbai: Students from different colleges gather outside Gateway of India to protest against the violence in Jawaharlal Nehru University earlier today. #Maharashtra pic.twitter.com/6XL5Sqk425
— ANI (@ANI) January 5, 2020
जेएनयू और पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी, एम्स पहुंचे खुर्शीद
Delhi: Protesters gather outside Police Headquarters against the violence in Jawaharlal Nehru University earlier today. pic.twitter.com/VW1baLvgdH
— ANI (@ANI) January 5, 2020
जेएनयू प्रशासन ने विवि में हुई हिंसा की निंदा की है। विवि ने कहा कि प्रशासन कैंपस में हुई किसी भी प्रकार की हिंसा की निंदा करता है। हिंसा में घायल हुए छात्रों को लेकर भी प्रशासन ने खेद व्यक्त किया है।
जेएनयू विवाद के बाद पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्रित हुए छात्रों ने रविवार देर रात आईटीओ जाम कर दिया। छात्रों की मांग है कि जल्द से जल्द इस मामले में मुकदमा दर्ज कर दोषियों को गिरफ्तार करना चाहिए। उनका आरोप है कि दिल्ली पुलिस इस मामले में काफी नरम रवैया अपना रही है। हाथों में मोमबत्तियां और होर्डिंग इत्यादि लेकर पुलिस मुख्यालय के बाहर काफी देर तक छात्र प्रदर्शन करते रहे। आईटीओ से नोएडा और पूर्वी दिल्ली जाने वाले मार्ग को छात्रों ने रोक दिया।
हालांकि खबर लिखे जाने तक पुलिस की ओर से छात्रों को ठोस कार्रवाई करने का आश्वासन दिया जा रहा था और छात्रों से सड़क मार्ग को अवरोध नहीं करने की अपील की जा रही थी। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि जेएनयू में घटना काफी गलत हुई है। इस मामले में तत्काल पुलिस को मारपीट करने वालों को गिरफ्तार करना चाहिए। हालांकि इस छात्रों के आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा। लेफ्ट छात्रों का आरोप है कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों ने हिंसा की है। जबकि एबीवीपी का कहना है कि इस घटना में उनके छात्र सबसे ज्यादा घायल हुए हैं। लेफ्ट के छात्रों ने उन पर लाठी, लोहे की रॉड इत्यादि से हमला किया है।देर रात को प्रदर्शनकारियों के बीच डी राजा पहुंच गए थे।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने जेएनयू हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। जनादेश द्वारा ठुकरा दिए गए जनाधार विहीन राजनीतिक दलों और नेताओं की हताशा विश्वविद्यालयों में हिंसा के रूप में सामने आ रही है।
जेएनयू में रविवार देर शाम को हालात नियंत्रण में रहे। दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन की अनुमति के बाद जेएनयू में प्रवेश कर लिया। पुलिस ने जेएनयू के अंदर फ्लैग मार्च किया। हॉस्टल के बाहर पुलिसकर्मी तैनात कर गए। पुलिस ने देर रात को जेएनयू को अपने कब्जे में ले लिया। जेएनयू के दोनों गेटों पर भारी संख्या में पुलिसबल तैनात रहा। दूसरी तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने देर रात दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की और जेएनयू की स्थिति के बारे में जाना। बताया जा रहा है कि गृहमंत्रालय ने जेएनयू बवाल को लेकर दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।