दोहरे हत्याकांड व गैंगरेप के बाद भी नहीं चेती पुलिस, पड़ताल में खुली सुरक्षा की पोल
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दोहरे हत्याकांड व गैंगरेप के मामले के बाद प्रशासन और पुलिस के इंतजाम सवालों के घेरे में हैं। पूरा गांव अंधेरे के आगोश में रहता है। यहां न तो स्ट्रीट लाइट का बंदोबस्त है और न ही पुलिस के पुख्ता इंतजाम।
घटना के बाद एहतियात के तौर पर तीन पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन वे निहत्थे हैं। ऐसे में हथियारबंद बदमाशों के धावा बोलने पर उनकी जान पर भी आफत आ जाएगी। गांव के सुरक्षा इंतजाम पर पेश है संवाददाता शाहिद मेवाती की रिपोर्ट:
गांव में पसरा सन्नाटा
घटना के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है। अब हर किसी को सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी है। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि घर के अंदर अगर इस तरह की वारदात हो रही है, तो आखिर वे जाएं तो जाएं कहां। घटनास्थल व आसपास कोई सुरक्षा व्यवस्था पुलिस प्रशासन की ओर से नहीं की गई है। न कोई पीसीआर लगाई गई है और न ही कोई अस्थायी चौकी स्थापित की गई है।
अंधेरे में रहते हैं ग्रामीण
तावड़ू खंड का अधिकांश गांव अंधेरे के आगोश में रहता है। प्रदेश में सत्ता बदली, नया निजाम आया, लेकिन गांव में स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था नहीं है। तावड़ू के घटना वाले गांव समेत अन्य गांवों में स्ट्रीट लाइट नहीं हैं, जबकि केएमपी से महज 200 मीटर दूर गांवों में लगातार आपराधिक घटना होने के बावजूद कोई इंतजाम नहीं किया गया। इसका फायदा उठाकर मुजरिम भाग जाते हैं।
तीन निहत्थे पुलिस वाले
वारदात के डर के कारण पीड़ित परिजनों ने घटना स्थल पर सोना छोड़ दिया है। घर अब सुनसान है। शुक्रवार सुबह 7 बजे घटना स्थल पर मात्र तीन जवान चारपाई पर बैठे हुए थे, लेकिन उनके पास हथियार नहीं हैं।
नियमित तौर पर कोई पीसीआर नहीं लगाई गई है, परंतु सुरक्षा को लेकर रात में पीसीआर गांव व घटना स्थल केएमपी तक पेट्रोलिंग करती रही है। जल्द ही कुछ और इंतजाम किए जाएंगे। गश्त बढ़ाई जाएगी।-सुमेर सिंह, डीएसपी
लाइट लगवाई गई थी, लेकिन वह अब खराब है। इसे दुरुस्त करवाने के लिए जिला प्रशासन से मदद ली जाएगी। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है, ग्रामीण घटना से डरे हुए हैं।-दीपक शर्मा, सरपंच