ऐसे कैसे कम होगा प्रदूषण?: दिल्ली में टूटा वाहनों के पंजीकरण का रिकॉर्ड, राजधानी पहले ही जाम-पॉल्यूशन से बीमार
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों से निजी वाहनों को कम करने के लिए सबसे पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना होगा। लेकिन इस पर गंभीरता से काम नहीं किया जा रहा है।
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राजधानी में जाम और प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार की तरफ से कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। खासतौर पर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत की दिशा में कई काम हो रहे हैं, लेकिन दिल्ली की जनता सार्वजनिक परिवहन के बजाय निजी वाहनों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। यही कारण है कि साल 2025 में राजधानी दिल्ली में निजी वाहनों के पंजीकरण का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 2025 में 8.16 लाख वाहन पंजीकृत हुए हैं। विशेष बात यह है कि यह आंकड़ा साल 2018 में सबसे अधिक 7.26 लाख वाहनों का था।
पंजीकरण में 75 फीसदी वाहन पेट्रोल वाली
जानकारों का कहना है कि जो नए निजी वाहनों के पंजीकरण हुए हैं उससे यह पता चलता है कि खरीददारों ने सार्वजनिक परिवहन के बजाय निजी वाहन से चलने को प्राथमिकता दे रहे हैं। पंजीकरण के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल पंजीकरण में 75 फीसदी वाहन पेट्रोल से चालित हैं। दिल्ली में डीजल से चलने वाले निजी वाहनों का पंजीकरण कम रहा है। लेकिन ई-वाहनों का पंजीकरण पेट्रोल से चलने वाले निजी वाहनों की तुलना में इनका हिस्सा बेहद कम है। ऐसे में दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या से प्रदूषण और जाम दो तरह की समस्याओं से निपटना मुश्किलों भरा हो सकता है। वर्तमान में राजधानी में निजी वाहनों की कुल संख्या 80 लाख से अधिक हो चुकी है। सीपीसीबी की रिपोर्टों में वाहनों से होने वाला उत्सर्जन दिल्ली के कुल प्रदूषण का लगभग 20 से 30 फीसद बताया गया है।
परिवहन व्यवस्था को किया जाए मजबूत...
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों से निजी वाहनों को कम करने के लिए सबसे पहले सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना होगा। लेकिन इस पर गंभीरता से काम नहीं किया जा रहा है। परिवहन विशेषज्ञ और दिल्ली परिवहन विभाग के पूर्व उपायुक्त डॉ. अनिल छिकारा का कहना है कि दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन ढांचा लंबे समय से योजनाहीन और तकनीकी रूप से पिछड़े ढर्रे पर चल रहा है। उनके अनुसार, शहर में बस संचालन लगातार कमजोर हुआ है, पैदल यात्रियों की सुरक्षा उपेक्षित है और सड़क ढांचा बेतरतीब विकास का शिकार बन चुका है। डीटीसी की बस फ्लीट घटती जा रही है, सेवाएं समयबद्ध और भरोसेमंद नहीं रहीं और बस नेटवर्क बिना किसी समग्र योजना के बिखरा हुआ है। जब तक बस रूटों की वैज्ञानिक री-प्लानिंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम सड़कें और बस सेवाओं में डेटा-आधारित सुधार लागू नहीं किए जाते, तब तक दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन लोगों के लिए न तो सुरक्षित बन पाएगा और न ही विश्वसनीय।
सरकार उठा रही कई कदम...
बीते माह दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा था कि बढ़ती यात्रियों की संख्या और विकसित दिल्ली के विजन को ध्यान में रखते हुए, दिल्ली सरकार ने रूट रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू की है ताकि सभी इलाकों में परिवहन की समान पहुंच सुनिश्चित की जा सके। इसके तहत भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बस कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर बस रूटों को फिर से डिजाइन किया जा रहा है। इससे बसों की पहुंच बढ़ेगी, वेटिंग टाइम कम होगा और सार्वजनिक परिवहन यात्रियों के लिए सुगम और भरोसेमंद विकल्प बन सकेगा। सरकार लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए बेहतर कदम उठा रही है। गौरतलब है कि राजधानी में आम यात्रियों के लिए सबसे किफायती और सुलभ परिवहन साधन डीटीसी की बसें हैं। बसें कम किराए में, सबसे ज्यादा दूरी और इलाकों तक पहुंचने की सुविधा देती हैं। बस से सफर सस्ता होने के साथ ही पर्यावरणीय लाभ भी है। एक डीटीसी बस में औसतन 50–60 यात्री सफर करते हैं, यानी प्रति व्यक्ति ईंधन खपत और उत्सर्जन सबसे कम।
| वर्ष | पंजीकरण संख्या |
| 2025 | 816051 |
| 2024 | 711113 |
| 2023 | 657889 |
| 2022 | 608138 |
| 2021 | 458529 |
| 2020 | 424294 |
| 2019 | 641889 |
| 2018 | 726830 |