उर्दू भाषा शायरी और तहजीब का कराती है समागम, 'शाम-ए-गजल' ने जीता लोगों का दिल
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सप्ताह का अंत, रिमझिम बारिश की फुहार और शाम-ए-गजल। वाह! क्या बात है, कुछ ऐसा ही ख्याल आता है जहन में। शनिवार की शाम, रिमझिम बरसात के बीच, नई दिल्ली स्थित उर्दू घर में सजी थी महफिल ए गजल ‘शाम-ए-गजल’, जहां उपस्थित थे मौसिकी के चाहने वाले श्रोता, गजल प्रेमी और शेरो-शायरी से तस्सवुर रखने वाले दिल्लीवासी और उनके बीच मौजूद थे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त गायक एवम कम्पोजर शकील अहमद। जिन्होंने अपने साथियों संग गजलों का ऐसा रंग घोला, जो उपस्थित श्रोताओं एवम अन्य पर बखूबी चढ़ा और सभी वाह-वाही करते नजर आये।
कार्यक्रम की शुरूआत शकील अहमद ने दिल्ली के बड़े शायर बहादुर शाह जफर की रचना बात कर लूं से की। उसके बाद उन्होंने ‘दिल ए नादान तुझे हुआ क्या है’ के साथ, एक के बाद एक विभिन्न गजलें प्रस्तुत की जिनमें उनकी एलबम ‘सोच के मोती‘ और ‘देखो तो‘ की गजलें भी शामिल रहीं।
मौके पर गैर सरकारी संगठन साक्षी की अध्यक्ष डॉ. मृदुला टंडन ने कहा कि, शकील अहमद शानदार कलाकार हैं, जिन्होंने हमेशा श्रोताओं को शानदार गायन से रोमांचित किया है। हमने उनके साथ काफी सारे कन्सर्ट किये हैं और यहां मैं बतौर श्रोता एवम् उनकी प्रशंसक मौजूद हूं।