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Delhi NCR News: सदर बाजार में अतिक्रमण पर चला बुलडोजर, व्यापारियों में नाराजगी
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-दुकानदारों ने बिना लिखित नोटिस कार्रवाई का लगाया आरोप, निगम बोला-पहले दी थी चेतावनी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। सदर बाजार में अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में नाराजगी देखने को मिली। कुतुब रोड चौक और आसपास के इलाकों में निगम की टीम ने दुकानों के बाहर बने शेड और लगे बोर्ड हटाए। कार्रवाई के दौरान कई दुकानदार सामान समेटते नजर आए। कुछ स्थानों पर व्यापारियों और निगमकर्मियों के बीच बहस भी हुई।
व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई ऐसे समय की गई है, जब त्योहारों के चलते बाजार में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि बाजार में अतिक्रमण और अव्यवस्था की समस्या का समाधान जरूरी है, लेकिन इसके लिए स्थायी योजना बनाई जानी चाहिए। दुकानों के बाहर सामान रखने की सीमा तय करने के साथ रेहड़ी-पटरी संचालकों के लिए भी उचित स्थान निर्धारित किया जाना चाहिए।
कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई लिखित नोटिस नहीं दिया गया। उनका कहना था कि यदि पहले सूचना दी जाती तो वे दुकानों के बाहर लगे शेड और अन्य सामान खुद हटा लेते। कारोबारियों ने कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
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दुकानदार अनंत ने कहा कि दुकानों में बिजली की सप्लाई चल रही थी और उसी दौरान लोहे के शेड हटाए जा रहे थे। ऐसे में हादसा होने पर जिम्मेदारी किसकी होती, यह बड़ा सवाल है। व्यापारियों ने यह भी पूछा कि यदि अतिक्रमण लंबे समय से गलत था तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कुछ कारोबारियों ने निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रेहड़ी-पटरी संचालक मुकेश विश्वकर्मा ने कहा कि कार्रवाई सभी के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कई दुकानदार भी दुकानों के बाहर काफी जगह तक सामान रखते हैं। केवल रेहड़ी हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। सदर बाजार में अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों में नाराजगी देखने को मिली। कुतुब रोड चौक और आसपास के इलाकों में निगम की टीम ने दुकानों के बाहर बने शेड और लगे बोर्ड हटाए। कार्रवाई के दौरान कई दुकानदार सामान समेटते नजर आए। कुछ स्थानों पर व्यापारियों और निगमकर्मियों के बीच बहस भी हुई।
व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई ऐसे समय की गई है, जब त्योहारों के चलते बाजार में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि बाजार में अतिक्रमण और अव्यवस्था की समस्या का समाधान जरूरी है, लेकिन इसके लिए स्थायी योजना बनाई जानी चाहिए। दुकानों के बाहर सामान रखने की सीमा तय करने के साथ रेहड़ी-पटरी संचालकों के लिए भी उचित स्थान निर्धारित किया जाना चाहिए।
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कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई लिखित नोटिस नहीं दिया गया। उनका कहना था कि यदि पहले सूचना दी जाती तो वे दुकानों के बाहर लगे शेड और अन्य सामान खुद हटा लेते। कारोबारियों ने कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
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दुकानदार अनंत ने कहा कि दुकानों में बिजली की सप्लाई चल रही थी और उसी दौरान लोहे के शेड हटाए जा रहे थे। ऐसे में हादसा होने पर जिम्मेदारी किसकी होती, यह बड़ा सवाल है। व्यापारियों ने यह भी पूछा कि यदि अतिक्रमण लंबे समय से गलत था तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कुछ कारोबारियों ने निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रेहड़ी-पटरी संचालक मुकेश विश्वकर्मा ने कहा कि कार्रवाई सभी के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कई दुकानदार भी दुकानों के बाहर काफी जगह तक सामान रखते हैं। केवल रेहड़ी हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।