जख्मी बच्ची का इलाज न करने पर एम्स को नोटिस
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लापरवाही और ज्यादती के परिणामस्वरूप हुई मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव, एम्स निदेशक और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है।
यह घटना 12 अगस्त की है। मीडिया में छपी खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए आयोग ने इसे गंभीर करार देते हुए मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया है। आयोग ने सभी को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने के लिए कहा है।
एक-एक अस्पताल से दूसरे तक दौड़ते रहे परिजन
12 अगस्त को दोपहर दो बजे दक्षिणी दिल्ली के रंगपुरी इलाके में एक ट्रक ने आठ वर्षीय नेहा को कुचल दिया था। उसके चाचा उसे सफदरजंग अस्पताल ले गए।
वहां से उसे एम्स भेजा गया और वहां से फिर उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। गौर करने वाली बात यह है कि पुलिसकर्मी के साथ में होने के बावजूद ट्रॉमा सेंटर ने बच्ची का इलाज करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद एक बार फिर से पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया गया। पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों से बात भी की। इसी दौरान चाचा की गोद में ही बच्ची ने दम तोड़ दिया।
चाचा प्रदीप का आरोप है बच्ची की स्थिति गंभीर थी लेकिन किसी ने भी उसकी जांच तक करने की जहमत नहीं उठाई।