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आतंकवाद से खतरनाक है कश्मीर में असमय बर्फबारी और वर्षा

Sun, 09 Dec 2018 12:47 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Sun, 09 Dec 2018 12:47 AM IST
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Unsecured snowfall and rain in Kashmir is dangerous than terrorism
सांकेतिक तस्वीर

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से भी बड़ी चुनौती जन्म ले रही है। धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की वादियों में गर्मी बढ़ रही है और ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसका खामियाजा किसानों को भोगना पड़ रहा है। दुनिया में सबसे अधिक करीब 6 हजार से अधिक ग्लेशियर इसी हिस्से में हैं।

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चेरी, बादाम और सैफरॉन की खेती करने वाले किसान असमय बारिश, बर्फबारी के चलते धीरे-धीरे बर्बाद हो रहे हैं।  कश्मीर में पर्यटन का दबाव और वादियों में बढ़ती हलचल ने कश्मीर की जलवायु को अस्थिर कर दिया है। यह तथ्य ‘जलालुद्दीन बाबा की डॉक्यूमेंट्री ग्लोबल वार्मिंग : कश्मीर चैप्टर’ का हिस्सा हैं। टॉक्सिक लिंक में पर्यावरणीय फिल्मों की प्रदर्शनी में उनकी फिल्म भी दिखाई गई। 
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फिल्म निर्माता जलालुद्दीन बाबा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वाटलर में पाकिस्तान से पीढ़ियों पहले आकर बसे समाद खान ने चेरी की खेती शुरू की थी। हालांकि, जब उनके चेरी के पेड़ फल देने लायक हुए तो असमय बर्फबारी ने उन्हें तबाह कर दिया।

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मार्च से अप्रैल में ही बर्फबारी हो जाती है।

यह जलवायु परिवर्तन का संकेत है। फिल्म में समाद खान बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहाड़ और पहाड़ के लोग दोनों बर्बाद हो रहे हैं। पहले आस-पास जंगल हुआ करते थे तब वर्षा होती थी। अब जंगल नहीं है तो वर्षा भी नहीं होती। 

वहीं, बादाम पैदा करन वाले किसान मोहम्मद सफी भट्ट कहते हैं कि दिसंबर से जनवरी के बीच पारंपरिक तौर पर कश्मीर में बर्फबारी होती थी। अब मार्च से अप्रैल में ही बर्फबारी हो जाती है। इससे चेरी के फूल बर्बाद हो जाते हैं। अनंतनाग निवासी मुहम्मद हुसैन बताते हैं कि बीते 3 से 4 वर्षों में बहुत तेजी से ग्लेशियर पिघल रहे हैं। खासतौर से जोजिला-बालटाल के हिस्से वाली ग्लेशियर।

चंढ़ारा पैमपोर निवासी हाजी अब्दुल अजीज ने कहा कि सिंतबर में वर्षा नहीं हुई। इसके चलते सैफरॉन की खेती बर्बाद हो गई।  फिल्म निर्माता जलालुद्दीन ने बताया कि इसका सिर्फ एक समाधान है कि ग्लेशियर पर हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल रोका जाए। इसके अलावा पर्यटन के तरीके में बदलाव लाया जाए। 
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