फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Unnao rape Case: Arguments on the quantum of sentence begins in delhi court sentence likely to come

उन्नाव कांडः अब 20 दिसंबर को होगी दोषी कुलदीप सेंगर की सजा पर बहस, मांगा ये शपथ पत्र

Tue, 17 Dec 2019 03:12 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 17 Dec 2019 03:12 PM IST
विज्ञापन
Unnao rape Case: Arguments on the quantum of sentence begins in delhi court sentence likely to come
कुलदीप सेंगर - फोटो : अमर उजाला

उन्नाव दुष्कर्म मामले में दोषी भाजपा से निष्काषित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर तीस हजारी कोर्ट में मंगलवार को बहस हुई जिसे 20 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया। अब सेंगर की सजा पर बहस 20 दिसंबर को होगी और इसी दिन उन्हें उस शपथ पत्र की कॉपी भी अदालत में जमा करनी होगी जो उन्होंने अपने 2017 के चुनाव के दौरान जमा किया था।

विज्ञापन

 
विज्ञापन
विज्ञापन

बहस के दौरान सीबीआई ने कहा-

सेंगर की सजा पर बहस के दौरान सीबीआई ने अदालत से कहा कि सेंगर को अधिकतम सजा दी जाए क्योंकि यह न्याय पाने के लिए एक व्यक्ति का व्यवस्था से संघर्ष है।

सोमवार को अदालत में कैसे दोषी करार दिए गए कुलदीप सेंगर

एक शक्तिशाली व्यक्तित्व के खिलाफ पीड़िता का बयान सच्चा और पर्याप्त है। यह टिप्पणी करते हुए तीस हजारी कोर्ट ने सोमवार को उन्नवा दुष्कर्म मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया। हालांकि इस मामले में अदालत ने सेंगर की सहयोगी आरोपी शशि सिंह को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है।



जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि यौन उत्पीड़न को लेकर पीड़िता द्वारा कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ दिया गया बयान सत्य और मुकम्मल है। चूंकि पीड़िता एक गांव की लड़की है, वह एक महानगरीय शिक्षित क्षेत्र से नहीं है। वह धमकियों से डरी हुई थी, इसलिए उसने आरोपी के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत जुटाने के लिए समय लिया।

अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए सेंगर को आईपीसी की धारा के तहत दुष्कर्म और पाक्सो के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट का यह फैसला सुनकर सेंगर परेशान होकर बेहोशी जैसी हालत में पहुंच गया। कोर्ट ने पाक्सो के बारे में कहा कि बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाओं को देखते हुए पाक्सो एक्ट बनाया गया था।

यह है अब तक का पूरा घटनाक्रम

यह कानून बच्चों को ऐसे मामलों में न्याय दिलाने के लिए बिल्कुल उचित है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस कानून के क्रियान्वयन और संबंधित अधिकारियों में मानवीय दृष्टिकोण की कमी के कारण इस मामले में पीड़िता को न्याय मिलने में देरी हुई। कोर्ट ने सीबीआई की खिंचाई करते हुए कहा कि खुद सीबीआई ने जांच और अभियोजन से संबंधित नियम का पालन नहीं किया।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में जब पीड़िता नाबालिग थी, तब कुलदीप सिंह सेंगर ने उसका अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अपने साथियों के सहयोग से अंजाम दिया था। इस मामले में कोर्ट ने सेंगर के सहयोगी शशि सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए थे।

कोर्ट ने सेंगर के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी (अपराधिक षड़यंत्र), 363 (अपहरण), 366 (अपहरण और महिला को शादी के लिए मजबूर करना), 376 (दुष्कर्म) और पाक्सो के तहत आरोप तय किए थे।

जुलाई में पीड़िता की कार पर ट्रक के जानलेवा हमले के बाद इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर की गई थी। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मोसी की मौत हो गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed