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केंद्र की रिपोर्ट में खुलासाः रैबीज ने दी कैंसर को मात, 2 सालों में एक भी मरीज नहीं बचा सके डॉक्टर

Wed, 27 Jun 2018 10:08 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 27 Jun 2018 10:08 AM IST
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union government shocking report says in tlast 2 years no rabies patient save by doctors in delhi
प्रतीकात्मक तस्वीर

आप मानें या न मानें, लेकिन यह हकीकत है कि कुत्तों के काटने से होने वाली बीमारी रैबीज से मौत ने कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी पीछे छोड़ दिया है। डॉक्टर पिछले दो वर्षों में इस बीमारी से एक भी मरीज की जान नहीं बचा सके।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि रैबीज को लेकर राज्यों को पुख्ता इंतजाम के निर्देश दिए गए हैं। दिल्ली में तमाम स्वास्थ्य सुविधाएं होने के बावजूद वर्ष 2016 में तीन और 2017 में 12 लोगों की रैबीज से मौत हो गई।
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 एक अधिकारी ने बताया कि रैबीज के लिए सभी सरकारी अस्पतालों में दवा और उपचार निशुल्क उपलब्ध है। फिर भी रैबीज के मरीजों को नहीं बचाया जा सका। जबकि कैंसर और कार्डियोवस्कुलर जैसी बीमारियों की मृत्युदर 50 से 60 फीसदी तक है।
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स्वाइन फ्लू और जापानी बुखार का दायरा भले ही ज्यादा है, लेकिन इससे मरीजों को बचा लिया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 और 2017 में देश में क्रमश: 93 और 97 लोग रैबीज से संक्रमित हुए। रैबीज के सबसे ज्यादा मामले पश्चिम बंगाल से मिले।

2017 की इन बीमारियों की रैबीज से तुलना

union government shocking report says in tlast 2 years no rabies patient save by doctors in delhi

बीमारी             केस      मौत      मृत्यु दर     
रैबीज                97        97         100     
जापानी बुखार   2180     252        12     
दिमागी बुखार   13036  1010        8      
स्वाइन फ्लू       38811   2266       6     
टिटनेस              295       9           6     
डिप्थेरिया       5293     148           3     

दिल्ली के बड़े अस्पतालों में इंजेक्शन नहीं
पड़ताल में दिल्ली के अधिकांश बड़े अस्पतालों जैसे दीनदयाल उपाध्याय, मदन मोहन मालवीय अस्पताल, राजा हरिश्चंद्र, गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल, डॉ. भीमराव आंबेडकर और डॉ. हेडगेवार अस्पतालों में रैबीज का इंजेक्शन नहीं है।

रैबीज होने पर इंसान को बचाना मुश्किल है, पर संक्रमण फैलने से बचाया जा सकता है। दिल्ली में कुत्तों के अलावा बंदर और चमगादड़ के काटने से भी रैबीज फैलता है। वैक्सीन से संक्रमण रोका जा सकता है, लेकिन दुर्भाग्य है कि अब तक राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में रैबीज को शामिल नहीं किया गया है। -डॉ. के के अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, आईएमए

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