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उबर रेप: अब पुलिस कार्रवाई पर भी खड़े हुए अहम सवाल

Tue, 17 Feb 2015 01:19 AM IST
Updated Tue, 17 Feb 2015 01:19 AM IST
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uber rape: 'car' when the cell operation, do not know who took

उबर कैब रेप केस मामले में बचाव पक्ष ने गवाहों को दोबारा गवाही के लिये बुलाने को आवेदन दायर कर पुलिस व अभियोजन पर कई गंभीर सवाल खड़े किये। बचाव पक्ष ने कहा कि एमएलसी में एक डॉक्टर के मुताबिक पीड़िता के शरीर पर किसी चोट आदि के निशान नहीं है तो दूसरे के मुताबिक उसी एमएलसी में चोट के निशान व सूजन है।

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सेक्सुअल किट को देरी से मालखाने में जमा कराने पर भी बचाव पक्ष ने सवाल उठाये। कार थाने के मालखाने से निकलकर ऑपरेशन सेल के ऑफिस कब कैसे चली गयी, यह सवाल भी बचाव ने उठाया। इस आवेदन पर कोर्ट बुधवार को फैसला सुनायेगी।
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तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कावेरी बावेजा के समक्ष सोमवार को अंतिम जिरह शुरु होनी थी। केस की सुनवाई शुरु होते ही बचाव पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने अभियोजन के गवाहों को दोबारा गवाही के लिये बुलाने को आवेदन दायर किया।

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फिर से गवाहों को बुलाने के लिए होगा आवेदन

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आवेदन का विरोध करते हुये विशेष लोक अभियोजन अधिकारी ने कहा कि गवाहों को दोबारा गवाही के लिये बुलाने संबंधी आवेदन कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी है। यह आवेदन केवल केस की सुनवाई को लंबा खींचने का हथकंडा है।

बचाव पक्ष ने कहा कि एक बार आवेदन खारिज होने से दोबारा आवेदन दायर करने का रास्ता बंद नहीं हो जाता। अधिवक्ता मिश्रा ने कहा कि यह आरोपी के जीवन और स्वतंत्रता का सवाल है।

केस की चार्जशीट व फाइल का हवाला देते हुये अधिवक्ता मिश्रा ने कहा इस मामले में पुलिस ने कई साक्ष्यों में हेरफेर किया व कई झूठे साक्ष्य पेश किये। केस की पहली जांच अधिकारी महिला  एसआई ने पीड़िता के मेडिकल के बाद सेक्सुअल किट कई दिन बाद मालखाने में जमा करवाई।

'कार' ऑपरेशन सेल कब गयी, कौन ले गया पता ही नहीं

uber rape: 'car' when the cell operation, do not know who took

बचाव पक्ष ने कहा कि माल खाना रजिस्टर में कार बरामदगी के सुपुर्दगी की इंट्री संख्या 3806 सात जनवरी को की गयी। सेक्सुअल कीट की इंट्री रजिस्टर में क्रम संख्या 3808 पर की गयी है। जबकि यह किट कार बरामद होने से पहले छह जनवरी को तैयार हो चुकी थी।

कार की मालखाना में सुपुर्दगी और उसके निरीक्षण के स्थान पर भी बचाव पक्ष ने सवाल उठाये। अधिवक्ता मिश्रा ने कहा कि पुलिस के मुताबिक सात जनवरी को कार मथुरा से लाकर थाने के मालखाने में रखवा दिया था।

सीएफएसएल की टीम ने इस कार का निरीक्षण आठ जनवरी को ऑपरेशन सेल के ऑफिस में किया गया। जिस कार का निरीक्षण किया गया वह कार कौनसी थी क्योंकि आरोपी की कार थाने के मालखाने में थी और इसके ऑपरेशन सेल ले जाने संबंधी कोई इंट्री मालखाना रजिस्टर में नहीं है।

अभियोजन के मुताबिक गुड़गांव स्थित विदेशी कंपनी की वित्तीय सलाहकार पीड़िता से आरोपी ने कथित रूप से पांच दिन दिसंबर की रात इंद्रलोक इलाके में अपनी कैब में दुष्कर्म व उससे मारपीट की। पुलिस ने महज 19 दिन जांच पूरी कर कोर्ट में 24 दिसंबर को चार्जशीट पेश की थी।

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