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कोरोना काल ने बदली दिल्ली की चालःसाइकिल का यू-टर्न, आसानी से कैलोरी होगी बर्न
Mon, 03 Aug 2020 04:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 03 Aug 2020 04:53 AM IST
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फर्राटा भरती साइकिलें...
- फोटो : अमर उजाला
खाली सड़कों पर फर्राटा भरती साइकिलें। जी हां, कोरोना काल में सड़कों पर सुबह-शाम साइक्लिंग करने वालों की तादाद बढ़ गई है। यहां तक कि बड़ी संख्या में लोग दफ्तर जाने के लिए भी साइकिल का इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली एनसीआर के लोगों की लाइफस्टाइल में बदलाव आने की अपनी वजह भी है।
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लॉकडाउन के दौरान सार्वजनिक और निजी वाहनों पर बंदिश लगने से साइकिल या राहगीरी ही लोगों की आवाजाही का जरिया बची। विशेषज्ञों की मानें तो सस्ता, सुलभ व आसानी से उपलब्ध होने की वजह से साइकिल मुफीद सवारी के तौर पर उभरकर आया है। इसमें सहूलियत इसलिए भी रही कि साइकिल से चलने की जगह भी मिली।
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साइकिल सेक्टर के विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना काल में वाहनों की बंदी से पैदा हुई मजबूरी से साइकिल की बिक्री की रफ्तार भी है। एक अनुमान के मुताबिक बीते तीन महीने में सौ फीसदी से अधिक मांग में इजाफा हुआ है।
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100 फीसदी की हुई बढ़ोतरी
फायरफॉक्स के सीईओ सुकान्त दास के मुताबिक कोरोना काल में साइकिल की मांग काफी बढ़ गई है। यह पहला ऐसा मौका है जब अचानक साइकिलों की बिक्री को नई रफ्तार मिली है। संक्रमण से बचाव और अपने जरूरी कार्य करते हुए भी फिटनेस जैसी खूबियों के कारण साइकिल की लोकप्रियता बढ़ी है। वर्ष 2019 मई-जून-जुलाई की तुलना में लॉकडाउन में साइकिल की मांग में 100 फीसदी का इजाफा हुआ है।
सड़कों पर वाहन कम होने से भर रहे हैं फर्राटा
सभी शहरों में साइक्लिंग करने वालों की तादाद इसलिए बढ़ी है, क्योंकि सड़कों पर वाहनों की संख्या कम रही। संक्रमण से बचाव और वाहनों की कम भीड़ होने की वजह से मांग में बढ़ोतरी हुई है।
रात के वक्त रिफ्लेक्टिव जैकेट जरूरी
सभी साइकिल की सीट के पीछे रिफ्लेक्टर लगे होते हैं। जानकारों के मुताबिक तमाम खूबियों के साथ साथ रात में रिफ्लेक्टिव जैकेट पहनना सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।साइक्लिस्ट राहुल का कहना है कि मैं हमेशा जैकेट पहनता हूं, ताकि सुरक्षित सफर कर सकूं।
एक घंटे में बर्न कर सकते हैं 800 कैलोरी
डॉ. देवेन्द्र गाबा के मुताबिक रोजाना अगर एक घंटे तक तेज रफ्तार में साइक्लिंग करते हैं तो करीब 800 तक कैलोरी बर्न कर सकते हैं। इससे न केवल शारीरिक तौर पर अधिक सेहतमंद होंगे बल्कि कई बीमारियों से कभी खुद का बचाव कर सकते हैं। इको फ्रैंडली साइकिल से किसी हानिकारक गैस का उत्सर्जन नहीं होता है। इससे प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में काफी मदद मिल सकती है।
कोरोना काल ने दिया सरकार को अवसर, बने साइकिल ट्रैक
परिवहन क्षेत्र में काम करने वाले नलिन चौधरी का मानना है कि सरकार कोरोना काल में आए इस बदलाव को स्थायी कर सकते हैं। इसके लिए सबसे जरूरी रोड डिजाइन में थोड़ा बदलाव कर साइकिल ट्रैक करना होगा। फिलहाल दिल्ली में कमी है। विकास मार्ग समेत चंद सड़कों को छोड़, किसी सड़क पर साइकिल ट्रैक नहीं है। अगर लोगों को साइकिल ट्रैक मिलता है तो छोटी दूरी के लिए साइकिल से जाने अधिक पसंद करेंगे। कोरोना काल ने इसे साबित कर दिया।