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दिल्ली हाईकोर्ट के ऑर्डर में टाइपिंग की गलती से छूटा डबल मर्डर का दोषी, अब हुआ गायब

Tue, 04 Apr 2017 09:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 04 Apr 2017 09:54 AM IST
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Typing mistake in the order, the double murder convict will be arrested again
delhi high court - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट के एक ऑर्डर में टाइपिंग की गलती से राजधानी में दोहरे हत्याकांड के दोषी को गलती से छोड़ दिया गया। अब मामला प्रकाश में आने के बाद अदालत ने दोषी को पुन: गिरफ्तार करने का निर्देश दिया गया है।

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इतना ही नहीं अदालत ने इस मामले में पुलिस को शिकायतकर्ता व चश्मदीद गवाहों को भी सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। फिलहाल दोषी फरार है।

10 मार्च 1999 में जितेंद्र उर्फ काला ने उत्तरी दिल्ली में एक विवाह समारोह में अनिल भड़ाना की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अनिल उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज स्टूडेंट यूनियन का अध्यक्ष था।
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इसके अगले दिन जितेंद्र इस हत्या के चश्मदीद गवाह सुमित नायर के घर पहुंचा लेकिन सुमित के न मिलने पर उसने उसके पिता केएल नायर की तीन गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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आपराधिक मामले में अनिल गवाह था, जिसके चलते उसने उसकी हत्या की

Typing mistake in the order, the double murder convict will be arrested again
file photo - फोटो : अमर उजाला

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया था कि जितेंद्र के खिलाफ एक आपराधिक मामले में अनिल गवाह था, जिसके चलते उसने उसकी हत्या की। निचली अदालत ने जितेंद्र को एक मामले में 30 साल की सजा व दूसरे में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने जितेंद्र की सजा के खिलाफ अपील को स्वीकार करते हुए 24 दिसंबर 2016 को जेल में काटी गई 16 वर्ष 10 माह की सजा के आधार पर उसे रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।

उधर जितेन्द्र की रिहाई के खिलाफ शिकायतकर्ता राज कुमार भाटी, चश्मदीद गवाह सुमित नायर व मृतक के भाई सुनील भड़ाना ने याचिका दायर कर सुरक्षा की मांग की।खंडपीठ के समक्ष मामला आने पर खंडपीठ ने फैसले में टाइपिंग की गलती मानते हुए 14 फरवरी 2017 को अपने फैसले से उसे रिहा करने संबंधी पंक्तियों को हटाया व जेल प्रशासन को उचित कदम उठाने का निर्देश दिया।

उधर, जितेन्द्र के अधिवक्ता ने भी अदालत को बताया कि दोषी उनके संपर्क में नहीं है और फरार है। इसके बाद खंडपीठ ने 22 मार्च को पुलिस आयुक्त को दोषी को ढूंढ कर जेल में भेजने व शिकायतकर्ता व अन्य गवाहों को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। 

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