{"_id":"6a8c595842a0c9b2e90f2f87","slug":"exposed-the-systems-flaws-while-making-the-audience-roar-with-laughter-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-151942-2026-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: दिल्ली के मंच पर हुआ मिर्जा गालिब का पुनर्जन्म, हंसा-हंसाकर खोले सिस्टम के पोल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: दिल्ली के मंच पर हुआ मिर्जा गालिब का पुनर्जन्म, हंसा-हंसाकर खोले सिस्टम के पोल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। एलटीजी ऑडिटोरियम में रविवार को चर्चित नाटक गालिब इन न्यू दिल्ली का 664वां मंचन हुआ। पियरोज ट्रूप की इस प्रस्तुति का लेखन व निर्देशन डॉ. एम सईद आलम ने किया है। यह नाटक 19वीं सदी के महान शायर मिर्जा गालिब के 21वीं सदी की दिल्ली में पुनर्जन्म की कल्पना पर आधारित है।
बस अड्डे पर जन्म लेने वाले गालिब आधुनिक दिल्ली की भागदौड़, महंगाई, राजनीति, नौकरशाही व बदलती सामाजिक संस्कृति से दो-चार होते हैं। पुराने दौर की नजरों से नई दिल्ली को देखकर वे हर स्थिति पर ऐसा व्यंग्य करते हैं कि दर्शक हंसते-हंसते अपने समय की सच्चाइयों पर सोचने को भी विवश हो जाते हैं।
नाटक में गालिब का पटना के छात्र के साथ सर्वेंट क्वार्टर में रहना, पंजाबी मकान मालकिन से नोकझोंक, सरकारी व्यवस्था से जूझना और पेज-3 सेलिब्रिटी बन जाना हास्यास्पद परिस्थितियां रचता है। 1997 से लगातार मंचित हो रहा यह नाटक हिंदी रंगमंच की सबसे लंबे समय तक चलने वाली लोकप्रिय कॉमेडी प्रस्तुतियों में शुमार है।
विज्ञापन
डॉ. एम सईद आलम ने खुद गालिब की भूमिका निभाई। उनके साथ अंजू छाबड़ा, हिमांशु श्रीवास्तव, हरीश छाबड़ा व राघव नागपाल ने प्रभावशाली अभिनय किया। चुटीले संवादों ने दर्शकों को गुदगुदाया तो आधुनिक समाज की विडंबनाओं पर गंभीर सवाल भी छोड़े।
विज्ञापन
नई दिल्ली। एलटीजी ऑडिटोरियम में रविवार को चर्चित नाटक गालिब इन न्यू दिल्ली का 664वां मंचन हुआ। पियरोज ट्रूप की इस प्रस्तुति का लेखन व निर्देशन डॉ. एम सईद आलम ने किया है। यह नाटक 19वीं सदी के महान शायर मिर्जा गालिब के 21वीं सदी की दिल्ली में पुनर्जन्म की कल्पना पर आधारित है।
बस अड्डे पर जन्म लेने वाले गालिब आधुनिक दिल्ली की भागदौड़, महंगाई, राजनीति, नौकरशाही व बदलती सामाजिक संस्कृति से दो-चार होते हैं। पुराने दौर की नजरों से नई दिल्ली को देखकर वे हर स्थिति पर ऐसा व्यंग्य करते हैं कि दर्शक हंसते-हंसते अपने समय की सच्चाइयों पर सोचने को भी विवश हो जाते हैं।
विज्ञापन
नाटक में गालिब का पटना के छात्र के साथ सर्वेंट क्वार्टर में रहना, पंजाबी मकान मालकिन से नोकझोंक, सरकारी व्यवस्था से जूझना और पेज-3 सेलिब्रिटी बन जाना हास्यास्पद परिस्थितियां रचता है। 1997 से लगातार मंचित हो रहा यह नाटक हिंदी रंगमंच की सबसे लंबे समय तक चलने वाली लोकप्रिय कॉमेडी प्रस्तुतियों में शुमार है।
विज्ञापन
डॉ. एम सईद आलम ने खुद गालिब की भूमिका निभाई। उनके साथ अंजू छाबड़ा, हिमांशु श्रीवास्तव, हरीश छाबड़ा व राघव नागपाल ने प्रभावशाली अभिनय किया। चुटीले संवादों ने दर्शकों को गुदगुदाया तो आधुनिक समाज की विडंबनाओं पर गंभीर सवाल भी छोड़े।