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सरकार के दो साल:खराब सड़कें और पानी की किल्लत जैसी समस्याएं बरकरार

Fri, 21 Oct 2016 09:18 AM IST
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Fri, 21 Oct 2016 09:18 AM IST
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two year of government and no sign of development in faridabad

हरियाणा में पहली बार अपने दम पर सत्ता में आई भाजपा सरकार दो वर्ष पूरे करने जा रही है। कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली औद्योगिक नगरी फरीदाबाद की छह में से चार विधानसभा सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी जनता का का दिल जीतने में कामयाब तो रहे लेकिन जनता की कसौटी पर खरे उतर रहे हैं या नहीं, यही जानने के लिए अमर उजाला ने विधानसभावार जनप्रतिनिधियों का दो साल का रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की कोशिश की है। पहली कड़ी में पेश है बड़खल विधानसभा क्षेत्र पर आधारित रिपोर्ट:

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इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व प्रदेश की मनोहरलाल सरकार में मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा के हाथों में है। कांग्रेस के कद्दावर नेता माने जाने वाले पांच बार विधायक रहे चौधरी महेंद्र प्रताप को तकरीबन 36 हजार वोट से हराने वाली त्रिखा ने दावा किया था कि महेंद्र प्रताप जो 25 साल में नहीं कर पाए वह वो पांच साल में कर दिखाएंगी।
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दो साल बीत गए हैं, लेकिन विधानसभा क्षेत्र में खराब सड़कें और पानी की किल्लत सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। बड़खल झील को दोबारा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की चुनौती बरकरार है।
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गर्मी की दस्तक के साथ ही बड़खल विधानसभा क्षेत्र में पानी की समस्या विकराल हो जाती है, इसकी वजह मांग की तुलना में पानी की आपूर्ति कम होना और भूजल स्तर का लगातार गिरना बताया जाता है।

इस साल गर्मियों में ग्रीन फील्ड, दयालबाग, शिव दुर्गा विहार, खोरी, सैनिक कॉलोनी की बड़ी आबादी को जल संकट से जूझना पड़ा था। नगर निगम मुख्यालय के बाहर इस समस्या को लेकर प्रदर्शन भी हुए।

हालांकि, विधायक की तरफ से 180 नए ट्यूबवेल और दो बूस्टर इस साल शुरू करने का दावा किया जा रहा है। अगर सड़कों की बात करें तो विधानसभा क्षेत्र के पॉश सेक्टरों की अधिकांश सड़कें जर्जर हालात में हैं।

मानसून में तो सड़कें तालाब बन गई थीं। विधायक की मानें तो सड़कों के सुधारीकरण की योजना के तहत 30 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। अगले साल तक सड़कें चकाचक मिलेंगी।

ये हैं उपलब्धियां
1:-बड़खल विधानसभा क्षेत्र को जिले के तीसरे उपमंडल का दर्जा दिलाने में मिली कामयाबी। 
2:-एनआईटी एक नंबर में 30 साल से लंबित सब्जी मंडी में दुकानों के निर्माण की रखी नींव।
3:-जाम से निपटने को 100 करोड़ की लागत से बनने वाले आउटर पेरिफेरल रोड को मंजूरी।
4:-पहली बार विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले सरकारी स्कूलों में वार्षिकोत्सव का आयोजन। 
5:-लकड़पुर, शिवदुर्गा विहार व दयालबाग में 37 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज का काम शुरू।

वादे जो हैं अधूरे
1:-बड़खल और नाहर सिंह स्टेडियम की खोई पहचान वापस दिलाने की प्रक्रिया सुस्त। 
2:-अवैध कॉलोनियों के लिए नहीं बना कोई एक्शन प्लान, सुविधाओं से वंचित हैं यहां के लोग।
3:-क्षेत्र में पेयजल संकट बरकरार, पानी का अवैध कारोबार करने वालों पर नहीं लगा अंकुश।
4:-क्षेत्र की सड़कों की हालत दयनीय, पॉश सेक्टरों की सड़कें भी गड्ढे में हो चुकी हैं तब्दील। 
5:-मानसून में जलभराव की समस्या बरकरार, तालाब में तब्दील हो जाते हैं व्हीकल अंडरपास। 

क्षेत्र का विकास मेरी प्राथमिकता
पक्ष : दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान करने में समय तो लगेगा ही। दो साल में क्षेत्र के लोगों के लिए जितना काम मैंने किया है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। बड़खल उपमंडल बनना अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा सड़कों के सुधारीकरण का काम जारी है। पेयजल आपूर्ति को काफी हद तक बेहतर बना दिया गया है। बिना किसी भेदभाव के संपूर्ण क्षेत्र का विकास मेरी प्राथमिकता है।
- सीमा त्रिखा, विधायक बड़खल एवं मुख्य संसदीय सचिव

दो साल में सिर्फ नारियल फोड़े
विपक्ष: पिछले दो साल में क्षेत्र की दशा और बिगड़ी है। स्थानीय विधायक सरकार में मुख्य संसदीय सचिव हैं, लेकिन क्षेत्र के विकास पर इसका असर नजर नहीं आ रहा है। विकास के नाम पर दो साल में केवल नारियल ही फोड़े गए हैं। जनता सड़कों की खराब हालत, पानी की समस्या से जूझ रही है। इस ओर ध्यान नहीं है। 

- धर्मबीर भड़ाना, पूर्व प्रत्याशी आम आदमी पार्टी

जनता बोले, नहीं बदले हालात
पिछली सरकार के कार्यकाल में क्षेत्र के जैसे हालात थे, उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। अपने विधायक से जनता को सड़क, बिजली और पानी की दरकार होती है। मुख्य सड़कें इतनी खराब हालत में हैं कि पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है। पेयजल आपूर्ति में खास सुधार नहीं हुआ है। तीन साल का कार्यकाल बचा है, ऐसे में जनता की उम्मीदें अभी बरकरार हैं। -आचार्य यतिन गौड़, निवासी एसजीएम नगर

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