बुजुर्ग मां हुई बेसहारा: 'भगवान बेटों की जगह मुझे ले जाता, अब किसके सहारे जिंदा रहूं', विलाप देख हर आंख हुई नम
बुजुर्ग शनिवार रात को दोनों बेटों व भतीजे के साथ दिल्ली से हरिद्वार गंगा स्नान के लिए जा रही थीं। मां के सामने ही टाटा मैजिक ने तीनों युवकों को टक्कर मार दी। जिससे वह बेहोश हो गईं, होश आने पर तीनों की मौत की खबर मिली।
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भगवान मेरे बच्चों की जगह मुझे ले जाता, अब मैं किसके सहारे जिंदा रहूंगी...। अपने दो बेटों को खोने के बाद बुजुर्ग सरस्वती देवी रो-रोकर बस यही कहे जा रही थीं।
दिल्ली-देहरादून हाईवे पर मुजफ्फरनगर में हुए सड़क हादसे में अर्जुन (28) और छोटे भाई देवेंद्र उर्फ अभिषेक (25) के अलावा चचेरे भाई रोहित उर्फ मोहित (25) की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा है। सरस्वती देवी शनिवार रात को दोनों बेटों व भतीजे के साथ दिल्ली से हरिद्वार गंगा स्नान के लिए जा रही थीं। मां के सामने ही टाटा मैजिक ने तीनों युवकों को टक्कर मार दी। हादसे के बाद तीनों युवकों को खून से लथपथ देखकर सरस्वती देवी बेहोश हो गईं।
जब होश आया तो बेटों के साथ भतीजे की मौत की खबर मिली। सरस्वती दिल्ली लौट आई हैं। परिजन उन्हें दिलासा देने का प्रयास कर रहे हैं। 11 महीने पहले ही सरस्वती के पति की कैंसर से मौत हुई थी। एक परिजन ने बताया कि चार भाई सुनील कुमार, अनिल, संजय और राकेश तुर्कमान गेट के नजदीक आसफ अली रोड, हमदर्द चौक पर रहते थे। सरस्वती और पति सुनील ने 30 साल पहले पुश्तैनी मकान छोड़कर बदरपुर के लक्कड़पुर फाटक के पास मकान बना लिया था।
सरस्वती परिवार में दो शादीशुदा बेटियां स्वाति और रवीना व बेटे अर्जुन व देवेंद्र थे। अर्जुन की शादी हुई थी, लेकिन किसी वजह से दो साल पहले तलाक हो गया था। अर्जुन व देवेंद्र निजी कंपनी में नौकरी करते थे, लेकिन कुछ माह पूर्व दोनों की नौकरी छूट गई थी। वहीं, रोहित उर्फ मोहित के परिवार में पिता संजय कुमार के अलावा 13 साल की छोटी बहन सिमरन है। मां ऊषा की कई साल पहले कैंसर से मौत हो गई थी। रोहित अजमेरी गेट के एक नर्सिंग होम में छोटा-मोटा काम करता था। पिता संजय अजमेरी गेट पर अंडे की रेहड़ी लगाते हैं।
सोमवार को दिल्ली लौटना था
कुछ दिनों से सरस्वती बेटों से हरिद्वार चलने के लिए कह रही थीं। दोनों भाई मां को ले जाने के लिए तैयार हुए तो रोहित ने भी साथ चलने की इच्छा जताई। तीनों भाई व सरस्वती अजमेरी गेट गोलचक्कर से शनिवार रात करीब 1:30 बजे हरिद्वार की बस में सवार हुए थे। चारों को सोमवार को दिल्ली लौटना था, लेकिन रास्ते में ही हादसा हो गया। रविवार को तीनों भाइयों के घरों पर रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ था। किसी को भी यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसा भी हो सकता है। परिजनों को अब सरस्वती देवी की चिंता रही थी।