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साल में दो जांच किडनी फेल होने से बचाएंगी, एम्स के विशेषज्ञों ने लोगों को दिया सुझाव दिए
Fri, 08 Mar 2019 09:55 PM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 08 Mar 2019 09:55 PM IST
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एम्स दिल्ली (फाइल फोटो)
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14 मार्च को दुनिया भर में विश्व किडनी दिवस मनाया जाएगा। किडनी से जुड़ी बीमारियां और मरीजों की बढ़ती संख्या को देख अबकी बार बीमारी के नियंत्रण पर जोर दिया जाएगा। ऐसे में देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के विशेषज्ञों ने किडनी फेल होने से बचने के लिए लोगों को कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं।
एम्स के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके अग्रवाल का कहना है कि एम्स में ज्यादातर मरीज किडनी फेलियर और डायलिसिस की अवस्था में पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों में किडनी प्रत्यारोपण के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होता, जबकि किडनी प्रत्यारोपण सरकारी अस्पतालों में चुनौती बना हुआ है, इसलिए जरूरी है कि लोगों को पहले से ही इन बीमारियों के बारे में जानकारी हो।
अमर उजाला से बातचीत में डॉ. अग्रवाल ने बताया कि आमतौर पर यूरिन में प्रोटीन और ब्लड में सीरम क्रिएटिनिन की जांच वर्ष में एक बार भी लोग कराएं, तो किडनी की कार्यशैली पर निगरानी रखी जा सकती है। एक वर्ष में एक ही बार ये टेस्ट कराए जा सकते हैं।
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हालांकि चिकित्सीय क्षेत्र में कुछ उच्च आशंका युक्त समूह भी हैं, जिन्हें ये जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। इनमें मधुमेह, हाइपरटेंशन, 60 वर्ष से ऊपर आयु, परिवार में किसी सदस्य को किडनी रोग, हाथ-पैर में सूजन, खून की कमी, मामूली चोट से हड्डी का टूटना, यूरिन में पस, दर्द, यूरिन कम या बार बार आना इत्यादि लक्षणों वाले लोगों को ये जांच जरूर करा लेनी चाहिए।
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एम्स के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एसके अग्रवाल का कहना है कि एम्स में ज्यादातर मरीज किडनी फेलियर और डायलिसिस की अवस्था में पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों में किडनी प्रत्यारोपण के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होता, जबकि किडनी प्रत्यारोपण सरकारी अस्पतालों में चुनौती बना हुआ है, इसलिए जरूरी है कि लोगों को पहले से ही इन बीमारियों के बारे में जानकारी हो।
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अमर उजाला से बातचीत में डॉ. अग्रवाल ने बताया कि आमतौर पर यूरिन में प्रोटीन और ब्लड में सीरम क्रिएटिनिन की जांच वर्ष में एक बार भी लोग कराएं, तो किडनी की कार्यशैली पर निगरानी रखी जा सकती है। एक वर्ष में एक ही बार ये टेस्ट कराए जा सकते हैं।
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हालांकि चिकित्सीय क्षेत्र में कुछ उच्च आशंका युक्त समूह भी हैं, जिन्हें ये जांच कराना अत्यंत आवश्यक है। इनमें मधुमेह, हाइपरटेंशन, 60 वर्ष से ऊपर आयु, परिवार में किसी सदस्य को किडनी रोग, हाथ-पैर में सूजन, खून की कमी, मामूली चोट से हड्डी का टूटना, यूरिन में पस, दर्द, यूरिन कम या बार बार आना इत्यादि लक्षणों वाले लोगों को ये जांच जरूर करा लेनी चाहिए।