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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Two Cabinet decisions on pollution: 30 EV machines for cleaning narrow roads.

Delhi NCR News: प्रदूषण पर कैबिनेट के दो फैसले, छोटी सड़कों की सफाई को 30 ईवी मशीनें

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 08:22 PM IST
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-आईआईटी दिल्ली के साथ पीएम 2.5 और पीएम-10 के स्रोतों की होगी रियल-टाइम निगरानी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कैबिनेट ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए मंगलवार को दो महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में छोटी सड़कों की सफाई के लिए 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया है। साथ ही आईआईटी दिल्ली के सहयोग से पीएम-2.5 व पीएम-10 के प्रदूषण स्रोतों की 24 घंटे रियल-टाइम निगरानी की व्यवस्था विकसित करने का फैसला लिया गया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इन दोनों फैसलों से सड़क की धूल पर जमीनी कार्रवाई के साथ प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों की वैज्ञानिक पहचान में मदद मिलेगी। सरकार के मुताबिक 10 मीटर से कम राइट ऑफ वे वाली करीब 609 किलोमीटर लंबी सड़कों को मशीनीकृत सफाई योजना में शामिल किया गया है। इनमें 250 वार्डों की 854 सड़कें हैं। दिल्ली नगर निगम को 30 ईवी आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध कराने के लिए अनुदान दिया जाएगा। मशीनों की तैनाती और संचालन एमसीडी करेगा। इस व्यवस्था पर 10 वर्षों में करीब 393.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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दूसरे फैसले के तहत आईआईटी दिल्ली के साथ पांच साल का सहयोग होगा। राउज एवेन्यू स्थित सुपर साइट और मोबाइल प्रयोगशाला को दोबारा सक्रिय किया जाएगा। इसके जरिए वाहनों, सड़क की धूल और बायोमास जलाने जैसे स्रोतों से होने वाले पीएम2.5 और पीएम10 प्रदूषण का लगातार आकलन किया जाएगा। परियोजना पर करीब 19.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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30 मशीनों से 609 किमी सड़कों की होगी सफाई
दिल्ली सरकार के फैसले में 250 वार्डों की 854 सड़कें चिह्नित की गई हैं। इनमें 10 मीटर से कम राइट ऑफ वे वाली सड़कें आती हैं। इनमें करीब 609 किमी सड़कें दायरे में आती हैं।
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प्रदूषण की रियल-टाइम होगी निगरानी
आईआईटी दिल्ली के साथ पांच साल के लिए सहयोग लिया जाएगा। इसमें पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्रोतों का आकलन आईआईटी दिल्ली करेगी। साथ ही राउज एवेन्यू सुपर साइट को सक्रिय किया जाएगा और मोबाइल प्रयोगशाला से हॉटस्पॉट की जांच की जाएगी।


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प्रदूषण के स्रोतों की पहचान क्यों अहम
हवा में मौजूदा समय में पीएम-10 और पीएम-2.5 की मात्रा (रियल-टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट) अलग-अलग प्रदूषण स्रोतों के योगदान का वैज्ञानिक आकलन किया जा सकेगा। इससे सरकार को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किस क्षेत्र में किस स्रोत के खिलाफ कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाए। वहीं, छोटी सड़कों पर मशीनीकृत सफाई बढ़ने से सड़क की धूल को नियंत्रित करने के प्रयासों का दायरा बढ़ेगा।
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