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Delhi NCR News: अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के दो आवेदन खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
साकेत कोर्ट ने अलफलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी द्वारा दायर दो आवेदनों को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि संज्ञान लेने के चरण में केवल शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर विचार करना आवश्यक होता है, न कि अभियुक्त द्वारा। सिद्दीकी ने इन दस्तावेजों को दाखिल करने की अनुमति मांगी थी, जिनके माध्यम से वे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में विरोधाभास उजागर करने का दावा कर रहे थे। उनके दूसरे आवेदन में एजेंसी को उन दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन पर अभियोजन शिकायत में निर्भर नहीं किया जा रहा है। 4 अगस्त को दिए आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने कहा कि यह सुस्थापित कानून है कि संज्ञान के चरण में अदालत को केवल शिकायतकर्ता (इस मामले में अभियोजन शिकायत) द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर विचार करना होता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रक्रिया जारी करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं, और यह केवल इतने तक ही सीमित है। अदालत के इस फैसले के बाद सिद्दीकी के आवेदनों पर आगे कोई कार्यवाही नहीं होगी।
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नई दिल्ली।
साकेत कोर्ट ने अलफलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी द्वारा दायर दो आवेदनों को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि संज्ञान लेने के चरण में केवल शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर विचार करना आवश्यक होता है, न कि अभियुक्त द्वारा। सिद्दीकी ने इन दस्तावेजों को दाखिल करने की अनुमति मांगी थी, जिनके माध्यम से वे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले में विरोधाभास उजागर करने का दावा कर रहे थे। उनके दूसरे आवेदन में एजेंसी को उन दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी, जिन पर अभियोजन शिकायत में निर्भर नहीं किया जा रहा है। 4 अगस्त को दिए आदेश में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने कहा कि यह सुस्थापित कानून है कि संज्ञान के चरण में अदालत को केवल शिकायतकर्ता (इस मामले में अभियोजन शिकायत) द्वारा प्रस्तुत सामग्री पर विचार करना होता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि प्रक्रिया जारी करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं, और यह केवल इतने तक ही सीमित है। अदालत के इस फैसले के बाद सिद्दीकी के आवेदनों पर आगे कोई कार्यवाही नहीं होगी।