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नागरिकता कानून के खिलाफ बोले महात्मा गांधी के प्रपौत्र, सरकार हमें गुलाम बनाना चाहती है
Thu, 16 Jan 2020 08:30 PM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Abhishek Singh
Updated Thu, 16 Jan 2020 08:30 PM IST
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सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन
- फोटो : Amar Ujala (फाइल फोटो)
महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने सीएए, एनआरसी और एनआरपी के खिलाफ केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमें सरकार गुलाम बनाना चाहती है, लेकिन हमें गुलाम नहीं बनना है। हम डरेंगे नहीं, हम टलेंगे नहीं। गुरुवार को आर्ट्स फैकल्टी के बाहर हुए प्रदर्शन व सभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकार नया इतिहास लिखना चाह रही है। लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। यह दूसरी आजादी की जंग है। एनआरसी भारत के नागरिकों के खिलाफ है। युवाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ जैसी लड़ाई लड़ी थी वैसी ही लड़नी पड़ेगी। भारत का भार अब युवाओं के कंधों पर है।
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'कानून लाकर समता और विविधता में घुसपैठ'
सीएए, एनआरसी व एनआरपी पर अपनी बात रखने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर भी प्रदर्शन में पहुंचीं। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के बीच दीवार खड़ी करके विभाजित करना चाहती है। आर्थिक व्यवस्था ध्वस्त हो रही है इस पर सरकार का ध्यान नहीं है। ऐसा कानून लाकर समता और विविधता में घुसपैठ की जा रही है। सरकार संवाद नहीं करना चाहती।
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उन्होंने मंच से नारा दिया कि सरकार हमसे डरती है, पुलिस को आगे करती है। युवा यह ध्यान रखें कि हमें टुकड़े-टुकड़े करने की साजिश हो रही है। जेएनयू के अंदर जो हुआ वह अहिंसा व गांधी जी पर हमला था। अहिंसा के संदेश पर अड़े रहना चाहिए। एनपीआर, एनआरसी और सीएए आपस में जुड़े हुए हैं।
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'लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा'
वकील व डीयू के सेंट स्टीफंस से पढ़ाई कर चुकीं करुणा नंदी ने कहा कि एनआरसी, एनआरपी और सीएए को खारिज करना जरूरी हैै। पहले सोचा जाता था कि हम सरकार को चुनते हैं, लेकिन अब यह स्थिति है कि सरकार नागरिकों को चुनेगी। सीएए, एनपीआर और एनसीआर को लेकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है। इस पर जागरूक होना जरूरी है। मंच से संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई।