त्रिलोकपुरीः पुलिस ने मुस्लिम महिलाओं से की हिंसा
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दिल्ली अल्पसंख्यक कमिशन के पास दर्ज कराई गई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि त्रिलोकपुरी में दंगों के दौरान पुलिस ने मुस्लिम महिलाओं पर बल प्रयोग करने के साथ ही उनके साथ बुरा व्यवहार किया था।
कमिशन में यह रिपोर्ट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने 30 अक्टूबर को लिखाई थी। इस शिकायत में दंगों के दौरान कल्याणपुरी और मयूर विहार फेस-1 की पुलिस की भूमिका की जांच करने की मांग की गई है।
इस शिकायत में पुलिस पर मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण गिरफ्तारियों, टॉर्चर, मारपीट, पॉवर का गलत इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने दंगों के दौरान तीन एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें 32 मुस्लिमों और 12 हिंदुओं को गिरफ्तार किया था।
हालांकि एसडीपीआई के राज्य सचिव अजीम खान का दावा है कि उन्होंने त्रिलोकपुरी के कई स्थानीय लोगों से बात की। लोगों ने बताया कि मुस्लिम पुरुषों को न सिर्फ सड़कों से बल्कि उनके घर से भी उठा-उठाकर जेल में डाला गया है।
पति और देवर को ले जाने पहले महिला को किया बेइज्जत
अल्पसंख्यक कमिशन में दर्ज कराई गई चार पेज की शिकायत में त्रिलोकपुरी दंगों के पीड़ितों ने गवाही दी है। इसमें कई मुस्लिम महिलाओं ने भी शिकायत दर्ज कराई है।
ऐसी ही एक शिकायत में त्रिलोकपुरी के ब्लॉक 27 में रहने वाली एक महिला ने कहा है कि 25 अक्टूबर को दिन में करीब 3:30 बजे 20-25 पुलिस वाले उसके घर में घुस गए। घर में घुसकर पुलिसवालों ने उसके पति और देवर जो टीबी का मरीज है उसे परेशान किया और उन्हें उठा ले गए।
एसडीपीआई के सचिव खान का कहना है कि पुलिस ने इस महिला के पति और देवर को ले जाने से पहले महिला का भी शारीरिक शोषण किया था। खान का आरोप है कि ऐसे ही पुरुष पुलिसवालों ने कई महिलाओं के साथ शारीरिक शोषण किया।
पुलिस ने सभी आरोपों से किया इंकार
कमिशन के पास दर्ज शिकायत में दावा किया गया है कि महिलाएं अब भी अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं। बताया गया है कि मुस्लिम महिलाओं में दहशत का यह माहौल त्रिलोकपुरी के उस क्षेत्र में है जहां मुस्लिम आबादी बहुत कम है।
अल्पसंख्यक कमिशन के चेयरमैन कमर अहमद ने बताया कि कमिशन दर्ज कराई गई शिकायतों की जांच कर रही है और त्रिलोकपुरी के लोगों से उनके अनुभव बांटने को भी कहा गया है। तीन सदस्यीय यह कमिशन दंगा प्रभावित इलाकों में शांति बहाली के लिए भी गया था।
अहमद ने बताया कि उन्हें अब तक पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। कमिशन अपनी जांच पूरी करके सभी शिकायतें पुलिस तक पहुंचा देगी। हालांकि एक सीनियर पुलिस अधिकारी जो इस जांच का हिस्सा रहे उन्होंने एसडीपीआई के दावे से इंकार किया है।
इस अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने दंगों के दौरान आरोपियों को पकड़ने और जांच कार्य में कोई भेदभाव नहीं किया है। उन्होंने एक बात और कही कि ऐसी कोई भी जगह नहीं थी जहां दंगे रोकने और दंगाईयों को तितर-बितर करने के लिए महिला पुलिस अधिकारियों की तैनाती न की गई हो।
साभारः इंडियन एक्सप्रेस