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Toxic Air: दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा रासायनिक प्रतिक्रियाओं का परिणाम, वैज्ञानिकों ने बताई सबसे खतरनाक बात

Sat, 29 Nov 2025 03:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जिनेवा/नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, जिनेवा/नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 29 Nov 2025 03:43 AM IST
सार

हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एयर-केमिस्ट्री और अर्बन पॉल्यूशन रिसर्च प्रोग्राम में लीड साइंटिस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहीं प्रो. कैथरीन हेलेन का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा सिर्फ प्रदूषित ही नहीं रासायनिक रूप से भी

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Toxic air in Delhi-NCR is the result of chemical reactions
दिल्ली-NCR में प्रदूषण गंभीर... - फोटो : self

विस्तार

दिल्ली- एनसीआर और सिंधु-गंगा के मैदानी इलाके में छाया भीषण वायु प्रदूषण अब सिर्फ धुंध या धुएं का मामला नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों के अनुसार यह वायुमंडल में तेजी से चल रही रासायनिक प्रतिक्रियाओं का परिणाम है, जो हवा को सामान्य प्रदूषण से कहीं अधिक जानलेवा बना रही हैं।

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विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में मौजूद सल्फर, अमोनिया, नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) आपस में मिलकर ओजोन, अमोनियम सल्फेट और अमोनियम नाइट्रेट जैसे अत्यंत विषैले यौगिक बनाते हैं, जो बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा रोगियों और हृदय रोगियों पर सीधे प्रहार करते हैं। 
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अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के पैनल की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली एनसीआर सहित सिंधु गंगा के मैदानी इलाकों के घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों की हवा में तीन प्रमुख प्रतिक्रियाएं सबसे घातक रूप में सक्रिय हैं। पहली, एनओएक्स और वीओसी ग्राउंड-लेवल ओजोन (ओ3) बना रहे हैं। धूप पड़ते ही वाहनों और उद्योगों से निकले नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (वीओसी) प्रतिक्रिया कर भूमि-स्तरीय ओजोन बनाते हैं। यह वही ओजोन है जो फेफड़ों की कोशिकाओं को सीधे नुकसान पहुंचाती है और इसका असर वापस नहीं सुधरता।
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दूसरी, थर्मल प्लांट से निकलने वाली सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2) और कृषि-कचरा स्रोतों से निकली अमोनिया (एनएच3) मिलकर अमोनियम सल्फेट नैनो-कण बनाती है, जो खून, दिमाग और गर्भनाल तक पहुंच जाते हैं। तीसरी, एनओएक्स और एनएच3 मिलकर अमोनियम नाइट्रेट बना रहे हैं। यह प्रतिक्रिया स्मॉग ब्लैंकेट को और मोटा, गहरा और खतरनाक बनाती है और यही कारण है कि ठंडी हवा में अस्थमा अटैक, हृदयाघात और सांस रुकने की घटनाएं बढ़ती हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी- यह केवल प्रदूषण नहीं, रासायनिक संकट
हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एयर-केमिस्ट्री और अर्बन पॉल्यूशन रिसर्च प्रोग्राम में लीड साइंटिस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहीं प्रो. कैथरीन हेलेन का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर की हवा सिर्फ प्रदूषित ही नहीं रासायनिक रूप से भी सक्रिय है। यह ऐसी प्रतिक्रियाएं चला रही है जो साइलेंट केमिकल टॉक्सिन्स पैदा करती हैं और सबसे खतरनाक बात यह है कि ये खुली आंखों से दिखाई नहीं देतीं। 

प्रो. कैथरीन दुनिया के उन वैज्ञानिकों में मानी जाती हैं जो रासायनिक प्रतिक्रियाओं से बनने वाले प्रदूषण (केमिकली एक्टिव एयर पॉल्यूशन) और उसके फेफड़ों, हृदय और मस्तिष्क पर प्रभाव पर दीर्घकालिक अध्ययन कर रही हैं।संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के एयर क्वालिटी साइंस डिवीजन में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एंड्रयू पार्क के अनुसार ग्राउंड-लेवल ओजोन, उत्तर भारत की सबसे कम चर्चा की गई लेकिन सबसे घातक समस्या है। यह फेफड़ों की कोशिकाओं को जला देती है और इसका नुकसान शरीर वापस ठीक नहीं कर पाता। वैज्ञानिक कहते हैं, दिल्ली- एनसीआर और सिंधु-गंगा के मैदान में हवा सिर्फ प्रदूषित नहीं, तेज रासायनिक परिवर्तन की अवस्था में है। समाधान नीति-स्तर पर जरूरी है, लेकिन व्यक्तिगत सुरक्षा जीवनरक्षक है। 

मानव शरीर को सबसे अधिक नुकसान 
वैज्ञानिकों के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर और सिंधु-गंगा के मैदानी क्षेत्र की हवा में मौजूद तीन रसायनिक उत्पाद मानव शरीर को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्राउंड-लेवल ओजोन फेफड़ों की कोशिकाओं को नष्ट कर देती है और इसका असर बच्चों तथा अस्थमा रोगियों पर सबसे तेज पड़ता है।अमोनियम सल्फेट नैनो आकार के कणों के रूप में रक्त और मस्तिष्क तक पहुंच जाता है तथा इसका सर्वाधिक खतरा बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए बताया गया है। वहीं अमोनियम नाइट्रेट हृदय और श्वसन तंत्र पर सीधा दबाव बढ़ाता है और इसके गंभीर परिणाम हृदय व फेफड़ों के मरीजों में सबसे पहले देखने को मिलते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये तीनों रसायन हवा में अदृश्य होते हैं, पर स्वास्थ्य पर इनका प्रभाव तत्काल और बेहद घातक है।


पर्यावरणीय क्षति गंभीर
विशेषज्ञों के अनुसार, रासायनिक प्रदूषण का प्रभाव सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वनस्पति और पारिस्थितिकी तंत्र पर भी व्यापक नुकसान देखा जा रहा है। ओजोन की अत्यधिक सांद्रता से पौधों की पत्तियों पर जलन के दाग दिखाई देते हैं और शहरी हरियाली तेजी से सूखने की प्रवृत्ति दिखा रही है। मिट्टी में अमोनिया और सल्फेट के बढ़ते स्तर के कारण इसकी उर्वरता घट रही है।

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