आज से नवरात्र शुरू, नौ दिन कृपा बरसाएंगी नौ देवियां, घट स्थापना के लिए यह है शुभ मुहूर्त
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शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो रहे हैं। देवी के स्वागत के लिए लोगों ने घरों और मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली हैं। सभी मंदिरों में विशेष पूजन अर्चन का प्रबंध किया गया है। घरों में कलश स्थापना के लिए लोग कलश, आम के पत्ते, पुष्प, जौ जरूरी पूजा सामग्री खरीदते नजर आए। धार्मिक मान्यता अनुसार देवी नवरात्र में हर साल अलग-अलग सवारियों पर सवार होकर आती हैं। पंडित प्रकाश जोशी के अनुसार, मां का आगमन नाव से होगा और हाथी पर उनकी विदाई होगी। बंगला पंचांग के अनुसार, देवी अश्व यानी घोड़े पर सवार होकर आएंगी और डोली पर विदा होंगी।
घट स्थापना मुहूर्त सिर्फ एक घंटा दो मिनट
इस बार भक्तों को नवरात्र पर घट या कलश स्थापना के लिए बहुत ही कम समय मिलेगा। जी हां केवल एक घंटा दो मिनट के अंदर ही घट स्थापना की जा सकती है । अन्यथा प्रतिपदा के स्थान पर द्वितीया को घट स्थापना होगी। 10 अक्तूबर, सुबह 6.22 से 7.25 मिनट तक शुभ मुहूर्त रहेगा (यह समय कन्या और तुला का संधिकाल होगा जो देवी पूजन की घट स्थापना के लिए अति श्रेष्ठ है) ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4.39 से 7.25 बजे तक है। 7.26 बजे द्वितीया तिथि शुरू हो जाएगी।
एक और मुहूर्त
यदि किन्हीं कारणों से प्रतिपदा के दिन सुबह 6.22 से 7.25 मिनट तक घट स्थापना नहीं कर पाते हैं तो अभिजीत मुहूर्त में 11.36 से 12.24 बजे तक ऐसा कर सकते हैं। लेकिन यह घट स्थापना द्वितीया में ही मानी जाएगी।
नवरात्र की तिथियां
प्रतिपदा / द्वितीया : 10 अक्तूबर - मां शैलपुत्री और ब्रह्मचारिणी का पूजन ।
तृतीया - 11 अक्तूबर - देवी चंद्रघंटा
चतुर्थी - 12 अक्तूबर - देवी कुष्मांडा
पंचमी - 13 अक्टूबर - देवी स्कंदमाता
पंचमी - 14 अक्तूबर - देवी स्कंदमाता
षष्ठी - 15 अक्तूबर - देवी कात्यायनी
सप्तमी - 16 अक्तूबर - देवी कालरात्रि
अष्टमी - 17 अक्तूबर - देवी महागौरी (दुर्गा अष्टमी)
नवमी - 18 अक्तूबर - देवी सिद्धिदात्री (महानवमी)
क्या करें
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना और अखंड ज्योति जलाई जाती है। इस दिन घर खाली नहीं छोड़ना चाहिए।
संभव हो तो खुद घर में रहें।
नवरात्र में व्रत रखने वाले व्यक्ति को न बाल कटवाने चाहिए और ना शेविंग करनी चाहिए। लेकिन बच्चों का मुंडन संस्कार करवाना शुभ होता है। नौ दिन तक दोपहर में सोना नहीं चाहिए, इससे व्रत का फल नहीं मिलता।
व्रत में साफ सुथरे और धुले कपड़े पहनने चाहिए। इससे मां प्रसन्न होती हैं। घर भी स्वच्छ रखना चाहिए।
नवरात्र में व्रत के दौरान चमड़े से बनी वस्तुओं जैसे बेल्ट, जूते और चप्पल, बैग आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।