राजधानी में आज से ऑटो-टैक्सी की हड़ताल, ओला-उबर पर बैन लगाने की मांग
राजधानी में ऑटो-टैक्सी वाले मंगलवार से हड़ताल पर चले गए हैं। टैक्सी यूनियन के नेताओं का कहना है कि हड़ताल लंबी चलेगी, जब तक दिल्ली सरकार यूनियन की मांग पूरी नहीं कर देती तब तक हड़ताल जारी रखी जाएगी।
हड़ताल में भारतीय मजदूर संघ के नेता भी शरीक हो गए हैं। मंगलवार को ऑटो-टैक्सी वालों की हड़ताल के कारण दिल्ली वालों को परेशान होना पड़ रहा है। सोमवार-मंगलवार रात से शुरू हो रही इस हड़ताल में दिल्ली में चलने वाले करीब 85 हजार ऑटो व 15 हजार के करीब काली-पीली टैक्सी सड़क पर नहीं उतरीं।
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व एयरपोर्ट पर भी हड़ताल रहेगी, लिहाजा यहां आने-जाने वालों को परेशान होना पड़ सकता है। एयरपोर्ट टैक्सी यूनियन टर्मिनल थ्री के नेता डीएन यादव ने बताया कि एयरपोर्ट संचालित करने वाली डायल कंपनी के कारण प्राइवेट टैक्सी वाले यात्रियों से ज्यादा किराया वसूल रहे हैं।
'जब तक सरकार नहीं मानेगी मांग, तबतक चलेगी हड़ताल'
इकॉनॉमिक टैक्सी जो 12.5 रुपये प्रति किलोमीटर के लिए स्वीकृत की गई है लेकिन यात्रियों से 23 रुपये प्रति किलोमीटर दिन में और 29 रुपये प्रति किलोमीटर रात में वसूली जा रही है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को और बुधवार को एयरपोर्ट पर हड़ताल रहेगी।
ज्वाइंट एक्शन कमेटी के नेता राजेंद्र सोनी ने बताया कि सोमवार देर रात से सभी ऑटो-टैक्सी वाले हड़ताल पर चले जाएंगे। सरकार से लड़ाई लंबी चलेगी।
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार टैक्सी वालों की मांगों को नहीं मानती है, तब तक हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी। टैक्सी यूनियन ने ओला-उबर पर बैन लगाने व एनसीआर में ऑटो-टैक्सी चलाने के परमिट जारी करने की मांग की है।
केंद्र सरकार के पाले में मामला : सत्येंद्र जैन
प्रस्तावित हड़ताल को लेकर दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री सत्येंद्र जैन ने सोमवार को ऑटो-टैक्सी यूनियन के साथ बैठक की। यूनियन को बताया गया कि दिल्ली में ओला, उबर की सेवाएं को प्रतिबंधित किया गया है, लेकिन सर्वर पर नियंत्रण न होने के कारण सरकार कुछ नहीं कर पा रही है।
जैन ने बताया कि दिल्ली सरकार अदालत में हलफनामा भी भी दे चुकी है। मामला अब केंद्र सरकार के पाले में है। आईटी विभाग दोनों कंपनियों के सर्वर को बंद कर दे तो यह सेवाएं अपने आप ही बंद हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने ऑटोवालों को हाईटेक बनाने के लिए पूछो ऐप लांच किया है। लेकिन अभी इससे अधिकतर ऑटो वाले नहीं जुड़े हैं जिससे उन्हें ग्राहक नहीं मिल पाते।
सरकार का मानना है कि ऑटो-टैक्सी की हड़ताल समस्या को लेकर नहीं, बल्कि राजनीतिक है। यदि ऑटो चालकों को ओला, उबर से समस्या होती तो वह कोर्ट का रुख करते। उधर, दिल्ली एयरपोर्ट टैक्सी एसोशिएशन ने भी हड़ताल की चेतावनी दी है।