'भारत में बाइक रेसिंग के शौक को स्पोर्ट्स बनाना बड़ी चुनौती'
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बाइक रेसिंग के लेजेंड माने जाने वाले और 1993 में 500 सीसी ग्रां प्री वर्ल्ड चैंपियन केविन स्वांत्ज का मानना है कि अमेरिका-यूरोप में मोटो जीपी का क्रेज 90 के दशक जैसा नहीं रहा।
भारत में बाइक रेसिंग और मोटर स्पोर्ट्स में अपार संभावनाएं हैं लेकिन ऑटो मोबाइल मैन्यूफेक्चरर्स की मदद के बिना इस शौक को स्पोर्ट्स नहीं बनाया जा सकता।
मोटर स्पोर्ट्स में अमेरिका और यूरोप का वर्चस्व तोडना भारत के लिए बड़ी चुनौती है। 25 ग्रां पी जीत चुके पूर्व चैंपियन केविन शनिवार को ग्रेटर नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (बीआईसी) पर शुरू हुए सुजुकी जिक्सर कप की ओपनिंग पर युवा बाइकर्स की हौसला अफजाई के लिए पहुंचे। वे पहली बार भारत के दौरे पर हैं।
बाइकिंग स्कूल खोलने की जताई ख्वाहिश
केविन ने भारत में अपना बाइकिंग स्कूल खोलने की इच्छा भी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि किसी मैन्यूफेक्चरिंग कंपनी का सहयोग मिला तो वे इस योजना पर जरुर काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि बाइकिंग में उन्हीं तकनीकों के इस्तेमाल की जरुरत है जिसे आप सड़कों पर इस्तेमाल करते हैं। केविन ने चार साल की उम्र में मिनी बाइकिंग की शुरुआत कर दी थी।
51 वर्षीय रेसर ने कहा कि बच्चों को हेलमेट और जरुरी सुरक्षा उपकरणों के साथ बाइकिंग में आगे बढ़ाएं। आजादी दें लेकिन लिमिट न तोडने दें।