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कैंसर प्रभावित स्तन के ऊतकों की पहचान हुई आसान, एम्स में आई नई तकनीक, डॉक्टरों ने बताई बड़ी उपलब्धि
Sun, 28 Jul 2019 09:58 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 28 Jul 2019 09:58 PM IST
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एम्स
- फोटो : फाइल फोटो
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देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में एक ऐसी नई तकनीक आई है जिसके जरिये डॉक्टरों को स्तन कैंसर के मामलों में मदद मिलेगी। इसका नाम है फ्लोरेसेंस इमेजिंग, जिसकी शुरुआत कुछ दिन पहले एम्स में हुई है। कैंसर सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एसवीएस देव का कहना है कि स्तन कैंसर के उपचार के लिए इस तकनीक से प्रासंगिक ऊतक की पहचान हो जाती है।
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स्तन कैंसर की सर्जरी के दौरान डॉक्टर रोगियों में एक सुरक्षित और सस्ती इंडोसायनीन ग्रीन (आईसीजी) डाई का प्रवेश कराते हैं। इस तकनीक का उपयोग करते हुए सर्जन सूक्ष्म वाहिकाओं व ऊतकों का रक्त प्रवाह देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रासंगिक ऊतक फ्लोरोसेंट हरे रंग में प्रकाशित होते हैं। वर्तमान में उपयोग की जाने वाली प्रौद्योगिकी जैसे नीले डाई की तुलना में इमेजिंग की विश्वसनीयता और कई अनुप्रयोग एक महत्वपूर्ण अंतर पैदा करता है। इस तकनीक की मदद से अब वे ना सिर्फ स्वस्थ्य ऊतकों का बचाव कर सकेंगे, बल्कि मरीज के सुरक्षा लिहाज से भी बेहतर रहेगा।
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सालाना कैंसर रोगियों को लेकर एम्स का हरियाणा के बाढ़सा गांव में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान हाल ही में शुरू हुआ है। कैंसर के लिए देश का ये अत्याधुनिक इकलौता केंद्र है, जहां प्रयोगशाला की एक दिन में 60 हजार से ज्यादा रक्त नमूनों की जांच क्षमता है। यहां रेडियोथैरेपी से जुड़ी कई नई तकनीकी मौजूद हैं। एम्स के डॉक्टरों की मानें तो आमतौर पर कैंसर ग्रस्त मरीज दूसरी स्टेज या उसके बाद ही पहुंचता है। वह पहले से ही काफी देर से आया होता है। ऐसे में इन मरीजों को तत्काल चिकित्सा की जरूरत होती है। एम्स में मरीजों का अत्यधिक भार है। इसलिए बाढ़सा स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में रोगियों को आसानी से उपचार संभव है।
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