गिरोह पर कब्जा करने के लिए मार डाला था सरगना
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एक्सप्रेसवे पुलिस ने ऑन डिमांड वाहन चोरी करने वाले गिरोह को दबोचा है। इनका नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है और लगभग सभी राज्यों में गिरोह के एजेंट सक्रिय हैं। कुछ दिन पहले गैंग के कुछ बदमाशों ने मिलकर सरगना की एक्सप्रेसवे इलाके में हत्या कर दी थी।
सोमवार शाम को पुलिस ने गोलचक्कर नोएडा के पास गैंग के बदमाशों सरिता विहार, दिल्ली निवासी अजीत सिंह व सुभाष, नोएडा के सेक्टर-44 निवासी उमेश और जैतपुर, दिल्ली निवासी सुरेंद्र व भोला प्रसाद को गिरफ्तार किया।
वहीं, गिरोह के प्रमुख बदमाश हरदोई निवासी सुरेश उर्फ लंबू व अमित और बिहार निवासी सोनू फरार होने में सफल हो गए। बदमाशों की निशानदेही पर पुलिस ने एक तमंचा, कारतूस, बाइक, स्कूटी, दो चोरी की कार, 33 मोबाइल फोन और 200 से ज्यादा कारों की चाभियां बरामद कीं।
रुपयों के लेनदेन और लीडरशिप पर हो गए थे नाराज
इस अंतरराज्यीय वाहन चोरों के गिरोह का सरगना कौशांबी, गाजियाबाद निवासी संजय वाडवानी था। संजय पूरा नेटवर्क चलाता था। देश के प्रत्येक कोने में उसने अपने एजेंट रखे हुए थे।
मूल रूप से गिरोह का नेटवर्क बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, नॉर्थ-ईस्ट, कोलकाता, गुजरात आदि जगहों पर फैला हुआ था। यहां से एजेंट विभिन्न गाड़ियों की डिमांड सीधा गैंग लीडर संजय से करते थे। उसके बाद संजय अपने हिसाब से संबंधित सदस्य को वह काम देता था और गाड़ी चोरी कर भेज दी जाती थी।
वाहन चोरी के बाद मिली रकम को संजय रख लेता था और केवल 20-30 हजार रुपये वह चोरी करने वाले और वाहन को बेचने वाले बदमाश को देता था। करीब 10 साल से संजय इस धंधे में लिप्त था। रुपयों के लेनदेन और संजय की लीडरशिप से अजीत, सुभाष, लंबू और अमित नाखुश थे।
उन्होंने 27 अप्रैल को बाकायदा संजय की हत्या की योजना बनाई। उन लोगों ने एक्सप्रेसवे इलाके स्थित जेपी सोसायटी में वाहन चोरी करने के लिए रेकी की और रात में वहां संजय को वाहन चोरी करने के लिए बुलाया। जैसे ही संजय वहां पहुंचा, उन्होंने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।
एनसीआर से एक हजार से ज्यादा गाड़ियां उड़ाईं
संजय का ध्यान दिल्ली-एनसीआर पर होता था। पुलिस का दावा है कि संजय ने दिल्ली-एनसीआर से एक हजार से ज्यादा वाहनों की चोरी कराई है। 2007 में संजय मालवीय नगर दिल्ली से चोरी के आरोप में जेल भी जा चुका है।
एसपी सिटी दिनेश यादव का कहना है कि बिहार में आठ गाड़ियों के बारे में पता चला है, जो नोएडा से चोरी की गई थी। उनकी छानबीन कर यहां लाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि संजय अलवर डॉन के नाम से भी जाना जाता था।
इस गिरोह के कुछ बदमाश अट्टा, सेक्टर-18 आदि पार्किंग में ठेकेदारों से मिले होते हैं। जैसे ही कोई अपनी नई गाड़ी वहां पार्क करता है तो ठेकेदार उससे चाभी मांग लेते। बदमाश चाभी को फौरन कंप्यूटराइज्ड चाभी बनाने वाले के पास ले जाते और उससे उसकी डुप्लीकेट चाभी बनवा लेते।
जब वाहन मालिक अपना वाहन लेने आता तो उसके पीछे बदमाश लग जाते। इसके बाद जैसे ही किसी अन्य जगह मालिक वाहन पार्क करता तो वह डुप्लीकेट चाभी से गाड़ी उड़ा लेते।