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तिहाड़ में बंद हर 5 में से 4 कैदियों की आय जानकर हो जाएंगे हैरान, आंकड़ों में आया डराने वाला सच

Sat, 09 Feb 2019 12:20 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 09 Feb 2019 12:20 PM IST
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tihar jail study shows more than half of inmates are driven to crime because of poverty
तिहाड़ जेल - फोटो : Social Media

तिहाड़ जेल प्रशासन ने एक रिपोर्ट तैयार की है जिसमें कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार तिहाड़ भेजे जाने वाले हर 5 से 4 कैदियों की मासिक आमदनी 8 हजार से कम होती है। इस रिपोर्ट में जेल प्रशासन ने गरीबी और अपराध के बीच के संबंध पर अध्ययन किया है।

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इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल नवंबर के अंत तक तिहाड़ में कुल 15468 कैदी थे जिनमें से 11945(77.2%) कैदियों की मासिक आय 8000 से भी कम थी। वहीं 667(4.3%) कैदियों का मासिक वेतन 16000 से 30000 के बीच था और 341(2.2%) कैदी 30000 से ज्यादा मासिक वेतन पाने वाले थे।
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जेल अधिकारियों के मुताबिक जेल प्रशासन ने इस तरह की रिपोर्ट 7 साल में पहली बार बनायी है। तिहाड़ जेल का प्रबंधन दिल्ली सरकार द्वारा किया जाता है और इसके 400 एकड़ परिसर के आसपास शहर के सबसे अमीर और गरीब लोग रहते हैं। यह ऐसी जेल है जहां बहुत मामूली अपराध में सजा पाने वाले मुजरिम बड़े-बड़े घोटालों को करने वाले कॉरपोरेट लीडर्स, बड़े नेताओं और अंडरवर्ल्ड के मुजरिमों के साथ में रहते हैं।
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जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार के गृह मंत्रालय को अपनी जो रिपोर्ट भेजी है उसमें बताया है कि आधे से ज्यादा कैदियों की परमानेंट जॉब नहीं थी जब वो गिरफ्तार हुए थे। आंकड़ों के मुताबिक 8079(52.2%) कैदी या तो काम नहीं करते थे या पार्ट-टाइम मजदूरी करते थे। उनमें 2800 किसान थे या खेत मालिक और 1180 कैदियों का अपना खुद का व्यापार था या तो वो व्यापारी थे। सिर्फ 214 कैदी ही राज्य या केंद्र सरकार में काम करते थे जब वो गिरफ्तार हुए थे।

जानिए क्या कहती है पूरी स्टडी

वरिष्ठ जेल अधिकारी ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन सच है कि इनसान जितना गरीब होता है उसके अपराधी बनने के चांस उतने ही बढ़ जाते हैं। लेकिन आज जेल में जो कुछ कुख्यात मुजरिम बंद हैं वह बहुत अमीर थे। गैंगस्टर नीरज बवाना जो 15 विभत्स अपराध करने के लिए सजा भुगत रहा है वह काफी अमीर घर से ताल्लुक रखता है और अपने ही कारणों की वजह से वह अपराधी बना।

अधिकारियों के मुताबिक हर 20-25% वो कैदी आते हैं जो आदतन अपराधी होते हैं। इन लोगों के पास कोई पक्की नौकरी नहीं होती। पिछले साल ऐसे 22% कैदी थे जो स्नैचिंग या चोरी के जुर्म में गिरफ्तार हुए थे। 2016 में तिहाड़ से रिटायर होने से पहले 35 साल तक यहां लॉ ऑफिसर रहे सुनील गुप्ता कहते हैं कि अधिकतर कैदियों को तो अच्छे से पेश तक नहीं किया जाता। आधे से ज्यादा कैदी दिल्ली के झुग्गी बस्तियों से होते हैं। यह कहना गलत होगा कि हर स्लम वाला अपराधी होता है। लेकिन सच तो ये है कि इनमें से अधिकतर अपने हालातों के चलते अपराधी बन जाते हैं। ये अपने लिए वकील नहीं कर पाते और लंबे समय तक जेल में रहते हैं। गुप्ता ने कहा कि शिक्षा भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है क्योंकि अधिकतर कैदी स्कूल छोड़ने वाले होते हैं। 

एक अन्य विशेषज्ञ अजय वर्मा के अनुसार देशभर की जेलों में बंद अधिकतर कैदी गरीब होते हैं। तिहाड़ में जेल 5 के अंदर बंद कैदी 18 से 21 साल की आयु के बीच के होते हैं। कुछ समय पहले हमने ऐसे कैदियों को ज्वेलरी डिजाइनिंग की ट्रेनिंग भी दी थी। ताकि वो जॉब कर सकें जिससे उनके अंदर से अपराध करने की प्रवृत्ति को कम किया जा सके। इस तरह के प्रयास हर जेल में होने चाहिए।

जेल के एक प्रवक्ता का कहना है कि अब कैदियों में अशिक्षा की दर कम हो रही है क्योंकि जेलों में पढ़ो और पढ़ाओ जैसे कैंपेन चल रहे हैं। क्लासें होती हैं ताकि कैदी दोबारा जुर्म की दुनिया में न जाएं।

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