{"_id":"691f7bcd069c635c8e000a21","slug":"three-way-kidney-swap-transplant-gives-life-to-three-people-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-113311-2025-11-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: थ्री-वे किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट से तीन लोगों को मिला जीवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: थ्री-वे किडनी स्वैप ट्रांसप्लांट से तीन लोगों को मिला जीवन
विज्ञापन
-ब्लड ग्रुप मैच न होने की वजह से सीधे ट्रांसप्लांट संभव नहीं था
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। साकेत के एक निजी अस्पताल में हाल ही में तीन मरीजों को थ्री-वे पेयर्ड किडनी ट्रांसप्लांट के जरिये नई जिंदगी मिली। इन मरीजों में पश्चिम बंगाल के शादाब अली (36), दिल्ली के जोगिंदर कुमार (52) और बिहार के विनोद कुमार (51) शामिल थे। हर मरीज के पास एक डोनर तो था, लेकिन ब्लड ग्रुप मैच न होने की वजह से सीधे ट्रांसप्लांट संभव नहीं था। इसलिए परिवारों ने पेयर्ड किडनी एक्सचेंज का विकल्प चुना। इस विशेष व्यवस्था में शादाब की पत्नी सिमरन परवीन ने अपनी किडनी जोगिंदर को दी, जोगिंदर की बहन सुमन ने विनोद को और विनोद की पत्नी पूनम देवी ने शादाब को किडनी दी। सभी छह लोगों तीन मरीज और उनके डोनर का ऑपरेशन सफल रहा और उन्हें एक हफ्ते के अंदर छुट्टी दे दी गई। सर्जरी को यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांट और रोबोटिक्स टीम ने मिलकर अंजाम दिया। डॉ. दिनेश खुल्लर ने बताया कि एडवांस्ड सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सभी मरीजों और डोनरों को साइंटिफिक तरीके से मैच किया गया, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। साकेत के एक निजी अस्पताल में हाल ही में तीन मरीजों को थ्री-वे पेयर्ड किडनी ट्रांसप्लांट के जरिये नई जिंदगी मिली। इन मरीजों में पश्चिम बंगाल के शादाब अली (36), दिल्ली के जोगिंदर कुमार (52) और बिहार के विनोद कुमार (51) शामिल थे। हर मरीज के पास एक डोनर तो था, लेकिन ब्लड ग्रुप मैच न होने की वजह से सीधे ट्रांसप्लांट संभव नहीं था। इसलिए परिवारों ने पेयर्ड किडनी एक्सचेंज का विकल्प चुना। इस विशेष व्यवस्था में शादाब की पत्नी सिमरन परवीन ने अपनी किडनी जोगिंदर को दी, जोगिंदर की बहन सुमन ने विनोद को और विनोद की पत्नी पूनम देवी ने शादाब को किडनी दी। सभी छह लोगों तीन मरीज और उनके डोनर का ऑपरेशन सफल रहा और उन्हें एक हफ्ते के अंदर छुट्टी दे दी गई। सर्जरी को यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांट और रोबोटिक्स टीम ने मिलकर अंजाम दिया। डॉ. दिनेश खुल्लर ने बताया कि एडवांस्ड सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सभी मरीजों और डोनरों को साइंटिफिक तरीके से मैच किया गया, जिससे सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई।