27 दरिंदों की हैवानियत की शिकार बनीं मासूम की ये हैं तीन सच्चाईयां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली के मंगोलपुरी की रहने वाली 17 वर्षीय युवती से जयपुर में 27 लोगों द्वारा रेप मामले में ये बात सामने आई है कि कैसे उसकी तस्करी की गई थी और किस मजबूरी में वो दिल्ली जाने को तैयार हो गई थी।
गौरतलब है कि लड़की को एक दंपति ने बहुराष्ट्रीय कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी दिलाने के लिए जयपुर ले गए, जहां उसे बेच दिया गया। बता दें कि पीड़िता इतनी आसानी से जयपुर जाने के लिए नहीं मानी थी उसे बताया गया था कि उसे हर महीने 60000 रुपए की सैलरी मिलेगी।
60 हजार सुनते ही किशोरी को लगा था कि उसकी सारी परेशानियां खत्म हो जाएंगी और वो अपने परिवार के दुखों को कुछ कम कर सकेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और उसे ऐसे हादसे से गुजरना पड़ा जो वो कभी नहीं भूल पाएगी।
क्यों करना चाहती थी नौकरी
17 वर्षीय पीड़िता जो नौकरी के ही भुलावे में जयपुर गई थी उसके नौकरी करने का कारण था कि उसके पिता जो एक दुकान चलाते हैं, काफी बीमार हैं और उसके भाई पिता का व्यापार संभाल रहे हैं।
जब पीड़िता के सामने 60 हजार रुपए प्रति माह का ऑफर आया तो वो इसलिए तैयार हो गई ताकि वो पिता का इलाज करा सके। उसे इसलिए कुछ भी गलत नहीं लगा क्योंकि जिस दंपति ने उसे नौकरी का झांसा दिया था उन्होंने कहा था कि वो एक एनजीओ चलाते हैं जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाती है।
जयपुर पहुंचकर पीड़िता को होटल इंद्रप्रस्थ के कमरा नंबर 406 में बंद कर दिया गया था जहां बारी-बारी से आकर ग्राहक उसका रेप करते थे। एक बार तो ऐसा भी हुआ कि उसे एक साथ 8-9 लोगों के साथ संबंध बनाने को कहा गया है।
कैसे भागने में हुई कामयाब
पीड़िता के बयान के अनुसार जयपुर में होटल में एक पायल नाम की महिला थी जो पीड़िता को हर बार किसी ग्राहक के आने पर तैयार करती थी। और ग्राहक के चले जाने पर उसका कमरा लॉक कर देती थी।
31 अगस्त के दिन उसकी निगरानी में तैनात लोगों ने उसकी खिड़की खुली छोड़ दी थी जिसकी मदद से वह कूद कर भागने में कामयाब हुई।
वहां से निकलकर वह बस अड्डे पहुंची जहां से वह दिल्ली वापस आई। दिल्ली में धौला कुआं पहुंचकर उसने अपने भाई को फोन किया और अपनी आप बीती कह सुनाई।