लाजपत नगर हादसे में जान गंवाने वाले तीनों युवकों की कलाइयां सूनी ही रह र्गइं। उनकी बहनों ने रक्षा बंधन के लिए पहले से तैयारियां की हुई थी, लेकिन बहनों की ख्वाहिश उनके दिल में ही रह गई।
जवान लड़कों की मौत के बाद से परिजनों का रोते-रोते बुरा हाल था। परिजन बस दोषियों को सजा दिलवाने और सरकार से उचित मुआवजे की मांग कर रहे थे। सोमवार शाम परिजनों ने तीनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया। मोहन अपने परिवार के साथ 21-ब्लॉक, कल्याणपुरी में रहता था।
इसके परिवार में पिता फूलसिंह, मां चंद्रकांता, पत्नी प्रीति, ढाई साल का बेटा लक्की व तीन माह की बेटी खनक व तीन भाई हैं। मोहन की एक ही बहन है जो खुर्जा में अपने पति के साथ रहती है। उसने रक्षा बंधन की पूरी तैयारी कर रखी थी। रविवार को वह दिल्ली आ भी गई थी, लेकिन उसे क्या पता था कि ठीक रक्षाबंधन वाले दिन ही घर से भाई की अर्थी उठेगी। मोहन के भाई बबलू ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई व मुआवजे की मांग की।
वहीं जोगिंद्र के परिवार का भी ऐसा ही हाल था। वह परिवार के साथ पांच-ब्लॉक खिचड़ीपुर में रहता था। इसके परिवार में चार बड़े भाई व एक बहन ब्रह्मवती है। वह अपने पति बलवंत के साथ मंडावली में रहती है। ब्रह्मवती की भी भाई को राखी बांधने की आस दिल में ही रह गई।
इधर अन्नू परिवार के साथ खिचड़ीपुर में रहता है। इसके परिवार में मां कमलेश, पत्नी मन्नू व एक सात साल का बेटा वीर व तीन भाई हैं। अन्नू की खुद की सगी बहन तो नहीं थी, लेकिन हर साल उसकी बुआ राजवती की बेटी उसे राखी बांधने घर आती थी।