{"_id":"58b786d74f1c1b7c05832a9c","slug":"three-accused-of-murdering-policeman-in-delhi-sentenced-life-imprisonment","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"13 साल पहले एसआई व गवाह का सिर काटने वालों को मरते दम तक जेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
13 साल पहले एसआई व गवाह का सिर काटने वालों को मरते दम तक जेल
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 02 Mar 2017 08:13 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तेरह साल पहले दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर व गवाह की गर्दन काटने वाले तीन लोगों को अदालत ने मरते दम तक जेल में रखने की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले में जघन्य मानते हुए तीनों दोषियों को सख्त सजा सुनाई है।
विज्ञापन
पेश मामले में दोषियों ने हत्या के बाद मृतकों के सिर काट लिए और उन्हें जला दिया। उसके बाद बिना सिर के शवों को अलग अलग स्थानों पर फेंक दिया था। मामला उत्तरी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके का है।
विज्ञापन
रोहिणी जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीके बंसल ने मंगोलपुरी निवासी जोगिंदर (42), उसके भाई राजेंद्र (55) व विनोद (34) को हत्या, अपहरण, लूट, आपराधिक साजिश व साक्ष्य नष्ट करने व आर्म्स एक्ट की धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
विज्ञापन
अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर गौर किया कि दोषियों ने सब इंस्पेक्टर सतीश कुमार व गवाह विजय कुमार स्वामी के हाथ बांधने के बाद गला घोंटकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद दोषियों ने इन दोनों के सिर काट लिए थे।
अदालत ने 267 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि दोषियों के कृत्य से बर्बरता साफ दिख रही है। वह केवल यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने मृतकों के सिर काटने के बाद जला दिए और शवों को कृषि विभाग बहादुरगढ़ व रोहतक रोड स्थित फैक्ट्री के नजदीक फेंक दिया।
परिजनों को एक-एक लाख रुपये मुआवजे
अदालत ने जोगिंदर व विनोद पर 80-80 हजार व राजेंद्र पर 83 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश दिया है।
पेश मामले में जोगिंदर व राजेंद्र की मां भी आरोपी थीं। मामले की सुनवाई के दौरान उसकी मौत हो गई थी और उसके खिलाफ सुनवाई बंद कर दी गई थी। अभियोजन अधिकारी हरविंदर कुमार ने दोषियों के लिए मौत की सजा मांगते हुए कहा था कि उन्होंने बेहद निर्मम तरीके से हत्या को अंजाम दिया है।
यह पेशेवर अपराधी हैं और उनके सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं है। अभियोजन के मुताबिक सतीश कुमार व विजय कुमार एक केस की पड़ताल के सिलसिले में 5 मार्च 2004 को मंगोलपुरी इलाके में गए थे।
यह लोग जब वापस नहीं आए तो केस दर्ज किया गया था। पुलिस को अगले दिन बिना सिर के दो शव मिले थे जनकी पहचान सतीश व विजय के रूप में हुई थी। इसके बाद जले हुए दो सिर भी मिल गए थे।
पेश मामले में जोगिंदर व राजेंद्र की मां भी आरोपी थीं। मामले की सुनवाई के दौरान उसकी मौत हो गई थी और उसके खिलाफ सुनवाई बंद कर दी गई थी। अभियोजन अधिकारी हरविंदर कुमार ने दोषियों के लिए मौत की सजा मांगते हुए कहा था कि उन्होंने बेहद निर्मम तरीके से हत्या को अंजाम दिया है।
यह पेशेवर अपराधी हैं और उनके सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं है। अभियोजन के मुताबिक सतीश कुमार व विजय कुमार एक केस की पड़ताल के सिलसिले में 5 मार्च 2004 को मंगोलपुरी इलाके में गए थे।
यह लोग जब वापस नहीं आए तो केस दर्ज किया गया था। पुलिस को अगले दिन बिना सिर के दो शव मिले थे जनकी पहचान सतीश व विजय के रूप में हुई थी। इसके बाद जले हुए दो सिर भी मिल गए थे।