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इस बार फलों के रंग से खेलें होली
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Fri, 14 Mar 2014 02:37 PM IST
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इस बार होली में रंगों के साथ ही फलों का भी अहसास होगा। बाजार में हर्बल रंगों के साथ ही फ्रूटी वाटर कलर आए हैं। नॉन टॉक्सिक फ्रूटी कलर्स लेमन, ऑरेंज, एप्पल और स्ट्राबेरी सहित विभिन्न फलों के फ्लेवर उपलब्ध हैं।
प्रति डिब्बा इनकी कीमत चालीस रुपये है, जबकि दस डिब्बों का पूरा सेट भी उपलब्ध है। मालीवाड़ा के रंग विक्रेता आरके गुप्ता ने बताया कि स्प्रे कलर और फ्रूटी कलर्स की खासी डिमांड है। लोग अब केमिकल वाले रंगों को कम पसंद कर रहे हैं, इसलिए हर्बल रंगों की ही डिमांड करते हैं।
रंगों में मौजूद हैवी मेटल त्वचा के लिए खतरनाक
रंगों का त्योहार आपकी रंगत उड़ा सकता है। इनमें मिले हैवी मेटल त्वचा में एलर्जी करने के साथ ही वक्त से पहले ही झुर्रियां भी डाल सकते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग सिर्फ नेचुरल कलर्स के साथ ही त्योहार मनाएं।
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कॉस्टमेटोलॉजिस्ट डा. भावुक मित्तल ने बताया कि रंग और गुलाल में मिले जिंक, कैडमियम, आर्सेनिक और निकेल जैसे हैवी मेटल त्वचा के लिए खतरनाक हैं।
रंग खेलने से पहले करें कुछ तैयारी
पक्के रंग से बालों को बचाने के लिए सिर को कपड़े या प्लास्टिक से ढकें।
चेहरे और हाथ-पैर पर मॉश्चराइजर और फिर नारियल का तेल लगाएं।
कपड़े ऐसे पहने, जिससे शरीर पूरी तरह ढक जाए।
अरारोट से बने गुलाल में केवड़ा जरूर मिलाएं।
रंग लगने के बाद ये करें
पक्का रंग लगने पर 3 से 4 बार तुरंत पानी से धोएं, जिससे 90 फीसदी रंग निकल जाएगा।
रंग को साफ करने में साफ्ट साबुन का ही इस्तेमाल करें।
त्वचा को रंगड़े नहीं बल्कि 2 से 3 बार नहाएं।
आंखों में रंग जाने पर लगातार पानी से धोएं।
सूखा रंग सांस के जरिए अंदर जा सकता है इससे बचें
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 6.30
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली पूर्णिमा को होली मनाई जाती है। इस साल 16 मार्च को भद्रा रहित लग्न में होलिका दहन किया जाएगा। पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि 16 मार्च को शाम 6.30 मिनट से 10.38 तक होलिका दहन किया जा सकता है। होलिका पूजन अपने-अपने क्षेत्र की मान्यता के अनुसार किया जाता है। वैसे सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक होलिका पूजन का शुभ मुहूर्त है।
इको फ्रेंडली होली मनाएं
होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर में जगह-जगह होलिका दहन के लिए उपले और लकडि़यां इकट्ठे किए जा रहे हैं। आरडब्ल्यूए का आह्वान है कि होली पर जमकर मस्ती करें लेकिन पर्यावरण और राष्ट्र की संपत्ति का नुकसान ना करें। होलिका दहन से पहले कुछ एहतियात बरती जाए तो होली सभी के लिए खुशहाली लेकर आएगी। आरडब्ल्य्ूए फेडरेशन के अध्यक्ष तेजेंद्रपाल त्यागी ने बताया कि इको फ्रेंडली होली मनाने के लिए सभी से अपील की जा रही है।
होलिका दहन के लिए ईंट और बालू बिछाने से सड़कों को टूटने से बचाया जा सकता है।
होलिका में हरे पेड़ों को न जलाएं।
होलिका में प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुएं जैसे टायर, प्लास्टिक आदि न डालें।
उपले और सूखी लकडि़यां डाल कर होली जलाएं।
केवल मुख्य जगहों पर होलिका जलाएं।
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प्रति डिब्बा इनकी कीमत चालीस रुपये है, जबकि दस डिब्बों का पूरा सेट भी उपलब्ध है। मालीवाड़ा के रंग विक्रेता आरके गुप्ता ने बताया कि स्प्रे कलर और फ्रूटी कलर्स की खासी डिमांड है। लोग अब केमिकल वाले रंगों को कम पसंद कर रहे हैं, इसलिए हर्बल रंगों की ही डिमांड करते हैं।
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रंगों में मौजूद हैवी मेटल त्वचा के लिए खतरनाक
रंगों का त्योहार आपकी रंगत उड़ा सकता है। इनमें मिले हैवी मेटल त्वचा में एलर्जी करने के साथ ही वक्त से पहले ही झुर्रियां भी डाल सकते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग सिर्फ नेचुरल कलर्स के साथ ही त्योहार मनाएं।
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कॉस्टमेटोलॉजिस्ट डा. भावुक मित्तल ने बताया कि रंग और गुलाल में मिले जिंक, कैडमियम, आर्सेनिक और निकेल जैसे हैवी मेटल त्वचा के लिए खतरनाक हैं।
रंग खेलने से पहले करें कुछ तैयारी
पक्के रंग से बालों को बचाने के लिए सिर को कपड़े या प्लास्टिक से ढकें।
चेहरे और हाथ-पैर पर मॉश्चराइजर और फिर नारियल का तेल लगाएं।
कपड़े ऐसे पहने, जिससे शरीर पूरी तरह ढक जाए।
अरारोट से बने गुलाल में केवड़ा जरूर मिलाएं।
रंग लगने के बाद ये करें
पक्का रंग लगने पर 3 से 4 बार तुरंत पानी से धोएं, जिससे 90 फीसदी रंग निकल जाएगा।
रंग को साफ करने में साफ्ट साबुन का ही इस्तेमाल करें।
त्वचा को रंगड़े नहीं बल्कि 2 से 3 बार नहाएं।
आंखों में रंग जाने पर लगातार पानी से धोएं।
सूखा रंग सांस के जरिए अंदर जा सकता है इससे बचें
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 6.30
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष पर पड़ने वाली पूर्णिमा को होली मनाई जाती है। इस साल 16 मार्च को भद्रा रहित लग्न में होलिका दहन किया जाएगा। पंडित दुलीदत्त कौशिक ने बताया कि 16 मार्च को शाम 6.30 मिनट से 10.38 तक होलिका दहन किया जा सकता है। होलिका पूजन अपने-अपने क्षेत्र की मान्यता के अनुसार किया जाता है। वैसे सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक होलिका पूजन का शुभ मुहूर्त है।
इको फ्रेंडली होली मनाएं
होलिका दहन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर में जगह-जगह होलिका दहन के लिए उपले और लकडि़यां इकट्ठे किए जा रहे हैं। आरडब्ल्यूए का आह्वान है कि होली पर जमकर मस्ती करें लेकिन पर्यावरण और राष्ट्र की संपत्ति का नुकसान ना करें। होलिका दहन से पहले कुछ एहतियात बरती जाए तो होली सभी के लिए खुशहाली लेकर आएगी। आरडब्ल्य्ूए फेडरेशन के अध्यक्ष तेजेंद्रपाल त्यागी ने बताया कि इको फ्रेंडली होली मनाने के लिए सभी से अपील की जा रही है।
होलिका दहन के लिए ईंट और बालू बिछाने से सड़कों को टूटने से बचाया जा सकता है।
होलिका में हरे पेड़ों को न जलाएं।
होलिका में प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुएं जैसे टायर, प्लास्टिक आदि न डालें।
उपले और सूखी लकडि़यां डाल कर होली जलाएं।
केवल मुख्य जगहों पर होलिका जलाएं।