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ऐसे होता है सरकारी पैसा बर्बाद: पूर्वी दिल्ली में वेलकम झील बनी क्रिकेट का मैदान, अब लोग लगाते हैं चौके-छक्के

Sun, 03 May 2026 06:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा सनी सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
सनी सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 03 May 2026 06:04 AM IST
सार

करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद झील में पानी नहीं है और पूरा क्षेत्र सूखकर मैदान में तब्दील हो चुका है। 

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This is how government money is wasted: Welcome Lake in East Delhi becomes a cricket ground
कभी यहां झील हुआ करती थी... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यमुनापार स्थित वेलकम झील, जो कभी इलाके की पहचान हुआ करती थी, आज बदहाली की तस्वीर बन गई है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद झील में पानी नहीं है और पूरा क्षेत्र सूखकर मैदान में तब्दील हो चुका है। करीब 32 एकड़ में फैला झील क्षेत्र पूरी तरह सूख गया है। झील के बीचों-बीच एक छोटा सा गड्ढा बचा है, जिसमें गंदा और बदबूदार पानी जमा है। बाकी हिस्से में स्थानीय लोग क्रिकेट खेलते नजर आए। 

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जानकारी के अनुसार झील के पुनर्जीवन का प्रस्ताव करीब 20 साल तक लंबित है। फंड की कमी के चलते काम शुरू नहीं हो सका। बाद में बजट स्वीकृत होने के बावजूद परियोजना समय पर पूरी नहीं हुई। दिसंबर 2020 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कोरोना महामारी के चलते देरी हुई। इसके बाद भी परियोजना आज तक अधूरी है। एक समय में झील करीब 39 एकड़ क्षेत्र में फैली थी लेकिन अतिक्रमण और लापरवाही से इसका दायरा घटकर 32 एकड़ रह गया है। इसमें भी केवल 14 एकड़ क्षेत्र में ही झील विकसित करने की योजना है।
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7 करोड़ का ट्रीटमेंट प्लांट बेकार
वर्ष 2014 में झील के पुनर्जीवन के लिए 22 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। योजना के तहत नालों के पानी को साफ कर झील में डालने के लिए करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) लगाया गया। हालांकि, यह प्लांट पिछले कई वर्षों से बंद पड़ा है। इसके कारण झील में पानी पहुंचाने की व्यवस्था ठप हो गई है।
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लोगों ने कहा...
पहले यहां पानी रहता था, लोग घूमने आते थे। अब देखो पूरा मैदान बन गया। इतने पैसे खर्च हुए पर पानी का नाम-निशान नहीं है। 
-किशन

हम तो साल से देख रहे हैं ये झील ऐसे ही सूखी पड़ी है। ज्यादा खराब हालत हो गई है। कोई देखने वाला ही नहीं है। 
-सुंदर पाल

हर साल यही सुनते हैं कि इस बार काम पूरा हो जाएगा। लेकिन हालत तो जस की तस है। अब तो लगने लगा है कि बस बातें ही हो रही हैं।            
-राम निवास 

यहां पानी नहीं है, बदबू आ रही है। ऊपर से लोग बोलते हैं कि यहां लेजर शो होगा, कैफे बनेगा। पहले झील में पानी तो लाओ।
-वसीम

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