ये दो फिल्में देख शैतान बना मासूमों का हत्यारा
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मासूमों के साथ दुष्कर्म, कुकर्म व हत्या करने के आरोपी रविंद्र कुमार ने रविवार को मीडिया के सामने खुलासा किया है कि वह दो फिल्में देखकर घिनौती वारदात करने लगा था।
आरोपी का कहना है कि वह नशा करते ही पागल हो जाता था और फिर वारदात करता था। उसका कहना है कि उसने घिनौनी वारदात की है, अब सरकार उसे जो सजा देगी उसे मंजूर है।
बेगमपुर थाने में आरोपी ने बताया कि उसने वर्ष 2007 के आखिरी व 2008 के शुरू में दो फिल्म शामरी और अंग्रेजी से हिंदी में डब हई ममी देखी थी। शामरी फिल्म 1985 में आई थी।
'जब बच्चे रोते थे तो मारता था'
बताया जा रहा है कि इन फिल्मों में शराब के नशे में मासूमों के साथ गलत हरकतें करते हुए दिखाया गया है। इन फिल्मों के देखने के बाद वह वारदात करने लगा था।
जब मीडियाकर्मियों ने उससे पूछा कि वह बच्चों को मारता क्यों था तो आरोपी की दलील थी कि बच्चे जब रोने व चीखने-चिल्लाने लग जाते थे वह उन्हें मार देता था।
रविंद्र कुमार ने माना कि उसने अपराध किया है। अब सरकार उसे जो सजा देगी वह उसे मंजूर है। हालांकि आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। लेकिन उसके चेहरे पर पश्चाताप जैसी कोई बात नहीं दिखी।
वहीं आरोपी रविंद्र कुमार की मां मंजू देवी और पिता ब्रह्मानंद रविवार को बेगमपुर थाने पहुंचे। उनका कहना था कि उनके बेटे को फंसाया गया है। कुछ लोग जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं। उनके बेटे ने कुछ नहीं किया।