मॉब लिंचिंग की इन 5 घटनाओं ने दुनिया के सामने देश को किया शर्मसार
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पिछले कुछ सालों में दिल्ली-एनसीआर की कुछ घटनाओं ने विश्वभर में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया है। ये घटनाएं ऐसी हैं जो किसी बंद कमरे में नहीं बल्कि बीच सड़क पर सैकड़ों लोगों के बीच अंजाम दी गई।
इन घटनाओं में एक खास ट्रेंड रहा है कि किसी अफवाह या शक में भीड़ ने किसी खास संप्रदाय के लोगों को निशाना बनाया। अचानक भीड़ जुटती है उस शख्स को घेरकर पीट-पीटकर मार डालती है।
इसपर चिंता जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपना फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि कोई कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता है। देश को भीड़तंत्र बनने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने संसद को इस मामले पर सख्त कानून बनाने के लिए भी कहा था।
दिल्ली-एनसीआर की जिन 5 घटनाओं के बारे में हम बात कर रहे हैं, उसमें एक चीज और कॉमन है कि भीड़ हमेशा गाय या बीफ के नाम पर जुटती है और मॉब लिंचिंग की घटना को अंजाम दे दिया जाता है। इन घटनाओं का इतना ज्यादा असर हुआ कि इसे विश्वभर के मीडिया में सुर्खियां बनीं जिसने भारत की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया।
इतना कुछ होने के बावजूद इस तरह की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। ऐसी ही एक घटना शुक्रवार रात को भी सामने आई जब गाय ले जा रहे एक युवक को गोतस्कर होने के शक में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला। आइए जानते हैं ऐसी ही पांच घटनाएं जो दिल्ली-एनसीआर में घटीं।
दादरी लिंचिंग
कहते हैं भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता। लेकिन, इन मामलों में भीड़ का चेहरा भी है, नाम भी और पहचान भी पहले बात करते हैं दादरी लिंचिंग की। सितंबर 2015 में दिल्ली के पास दादरी इलाके में अखलाक नाम के अधेड़ को उनके घर से खींचकर निकालने और पीट-पीट कर हत्या कर डालने की घटना को देश के संस्कृति मंत्री महेश चंद्र शर्मा महज़ एक "दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना" बताते हैं।
भीड़ ने अखलाक के अलावा उसके बेटे पर भी जानलेवा हमला किया था। इस घटना के बाद अखलाख का पूरा परिवार तहस नहस हो गया। ऐसा माहौल बना कि अखलाक के परिवार को घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा।
तीन साल हो गए न दोषियों को सजा हुई न परिवार को इंसाफ मिला न ही पुलिस को बीफ। हालांकि, मामले में जांच के बाद भी पुलिस को अखलाक के घर या फ्रिज से कोई बीफ नहीं मिला था। जो मिला था वो मटन था, ना कि बीफ। यह पहली घटना थी जिसने लिंचिंग शब्द को लोगों के बीच पहुंचाया और फिर ये सिलसिला चल निकला जो आज तक कायम है।
पहलू खान(अलवर लिंचिंग)
राजस्थान के अलवर शहर के पास एक अप्रैल 2017 को ट्रैफिक भरे हाइवे पर पहलू खान को चारों ओर से घेर कर पीटा गया। पीटे जाने का वीडियो गौर से देखेंगे तो पाएंगे कि उसे पीटने वाले लड़के आम कस्बाई लड़कों जैसे ही थे। कुछ जींस-टी शर्ट में थे और कुछ पैंट क़मीज़ पहने हुए थे।
पीटने वाले सभी नौजवान नज़र आते हैं। वो पहलू खान को सड़क के बीच से खदेड़ते हुए, पीटते हुए हाइवे के फुटपाथ पर लाते हैं। पूरे हंगामे में सफेद कुर्ता पायजामा पहने हुए पहलू खान फुटपाथ पर बैठ जाते हैं जैसे शिकारी कुत्तों के बीच घिरा हुआ कोई मेमना हो।
हमलावर लड़कों के सिर पर ख़ून सवार है और वो जितना उन्हें पीटते हैं उनका गुस्सा उतना ही बढ़ता जाता है। यहां तक कि पहलू खान और उसके साथियों को पीट-पीट कर अधमरा कर देने के बावजूद उनके सिर से खून नहीं उतरता।
दो हमलावर लड़के वहां खड़ी सफ़ेद रंग की एक गाड़ी के स्टील के बोनट को पूरी ताक़त लगाकर मोड़ देते हैं और जब अंदर से इंजन दिखने लगता है तो उनमें से एक भारी पत्थर उठाकर इंजन पर दे मारता है। ये सब सिर्फ इसलिए क्योंकि पहलू गाय ले जा रहा था और भीड़ ने उसे गो-तस्कर समझ लिया। उसका परिवार आज तक पहलू के दोषियों को सजा दिलाने की मांग कर रहा है।
जुनैद लिंचिंग
दिल्ली से मथुरा जा रही ईएमयू में विवाद सीट पर बैठने को लेकर शुरू हुआ था। जुनैद अपने तीनों भाई के साथ दिल्ली में ईद की खरीदारी करने आया था। लौटने के लिए वे ईएमयू में सवार हुए।
सीट खाली मिली तो बैठ गए और वक्त गुजारने के लिए लगे लूडो खेलने। इसी दौरान अगले स्टेशन से लोग सवार हुए। इनमें से कुछ लोगों ने उसे लूडो खेलने से रोका और सीट छोड़ने को बोला।
इसी बात को लेकर उनके बीच बहस शुरू हो गई। दूसरे पक्ष ने जुनैद के पहनावे और खाने-पीने को लेकर टिप्पणी की। धीरे-धीरे दो पक्षों का विवाद दो संप्रदाय के विवाद में तब्दील हो गया। धक्का-मुक्की से शुरू हुई लड़ाई चाकूबाजी तक जा पहुंची।
जुनैद और उसके भाइयों पर हमलावरों ने कई वार किए। भीड़ में से कुछ लोग मारो मारो कहकर हमलावरों को उकसा रहे थे। आरोपी जुनैद को खून से लथपथ असावटी स्टेशन पर उतार कर आगे बढ़ गए। उसकी तरफ किसी ने मदद का हाथ नहीं बढ़ाया। समय पर इलाज नहीं मिलने से उसकी मौत हो गई।
हापुड़ लिंचिंग
सोमवार दोपहर गांव बझैड़ा खुर्द निवासी कुछ महिलाएं जंगल में चारा काटने गईं थीं। वहां उन्होंने चार लोगों को तीन गायों व एक बछड़े को जंगल के रास्ते से ले जाते हुए देखा।
इस पर महिलाओं ने गांव में पहुंचकर लोगों को मामले की जानकारी दी। गायों को गोकशी के लिए ले जाने की सूचना कुछ ही देर में पूरे गांव में फैल गई। सैकड़ों की तादाद में ग्रामीण एकत्र होकर मौके पर पहुंच गए।
भीड़ को आता देखकर उक्त लोगों ने गायों को मौके पर छोड़कर भागने का प्रयास किया। मगर, ग्रामीणों ने घेराबंदी करते हुए दो लोगों को दबोच लिया। अन्य दो लोग ग्रामीणों पर फायरिंग करते हुए भाग गए। भड़की भीड़ ने दोनों व्यक्तियों से जमकर पिटाई कर दी, जिसमें दोनों घायल होकर लहूलुहान हो गए। मामले की जानकारी दोनों सुमदायों के लोग आमने-सामने आ गए।
सूचना पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस क्षेत्राधिकारी पवन कुमार व कोतवाली प्रभारी अश्वनी कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और किसी तरह दोनों समुदायों के लोगों को समझा बुझाकर मामला शांत कराया। पुलिस ने घायलों को नगर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
पुलिस ने बताया कि घायल मोहल्ला सद्दीकपुरा निवासी कासिम(45) की उपचार के दौरान मौत हो गई है। हालांकि बाद में इस मामले में एक फोटो वायरल हुई जिसमें भीड़ मृतक को घसीटकर कर ले जा रही है और पुलिस उसके आगे चल रही है। इस एक तस्वीर ने पुलिस प्रशासन और लिंचिंग की सारी पोल खोल दी।
अलवर लिंचिंग(अकबर खान)
राजस्थान के अलवर में गो तस्करी के आरोप में लोगों ने एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी है। यह घटना रामगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लालवंडी गाव की है। मृतक शख्स का नाम अकबर खान है जो हरियाणा के कोलगांव का रहने वाला है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है। मृतक दो गाय लेकर जा रहा था तभी उसपर हमला किया गया।
गायों को गौशाला भिजवा दिया गया है। इस मामले पर पुलिस का कहना है, यह अभी साफ नहीं है कि वह गो तस्कर थे या नहीं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हम आरोपियों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं और जल्द ही उन्हें पकड़ लिया जाएगा।