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इन कानूनी पेंच के चलते नजीब जंग ने स्वाति को रोका

Thu, 23 Jul 2015 05:27 PM IST
Updated Thu, 23 Jul 2015 05:27 PM IST
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These are the reasons that LG prevented Swati  from office

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल और अन्य सदस्यों की नियुक्ति में तकनीकी पेच और अहम की लड़ाई सामने आई है। आम आदमी पार्टी की सरकार ने महिला आयोग के पुनर्गठन में उपराज्यपाल से स्वीकृति नहीं ली तो राज निवास ने पत्र भेजकर इस पुनर्गठन को गैर कानूनी बता दिया है।

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उपराज्यपाल के सचिव ने पत्र में लिखा है कि एलजी की स्वीकृति के बिना अधिसूचना किन परिस्थितियों में जारी की गई। ‘उपराज्यपाल के आदेश पर’ लिखकर अधिसूचना जारी करने के तथ्य और हालात पर प्रधान समाज कल्याण सचिव से 28 जुलाई तक जवाब तलब किया है।
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उपराज्यपाल की अनुमति के बिना उनके नाम पर अधिसूचना जारी करने के मामले में प्रधान सचिव पर कार्रवाई भी संभव है। उपराज्यपाल के सचिव एससीएल दास ने पत्र में गृह मंत्रालय की 25 जुलाई 2002 की एक अधिसूचना का हवाला देकर कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सरकार का मतलब उपराज्यपाल है,जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और यह संविधान की धारा 239 ए में उल्लेखित है।

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पिछली बार ली पर अनुमति लेकिन अब नहीं

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इतना ही नहीं 2009 और 2014 में आयोग के पुनर्गठन के लिए स्वीकृति लेने के पत्र का हवाला देकर कहा है कि पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनवरी, 2014 में पुरानी अध्यक्ष को हटाने और उनकी जगह नया अध्यक्ष बनाने की फाइल भी भेजी थी।


इस बार स्वीकृति नहीं ली गई और बिना स्वीकृति के अधिसूचना जारी कर दी गई। राज निवास से आई चिट्ठी की प्रति मुख्य सचिव, महिला आयोग की सदस्य सचिव और प्रधान समाज कल्याण सचिव को भेजी गई है। आयोग की सदस्य सचिव से कहा गया कि वह जो फैसले या कार्रवाई करेंगे वह मान्यता नहीं रखेगा।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार ने 17 जुलाई को स्वाति मालीवाल को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष व तीन अन्य को सदस्य बनाए जाने की अधिसूचना जारी की थी।

स्वाति ने 20 जुलाई को कार्यभार संभाला। एक दिन कामकाज भी किया और 22 जुलाई को जीबी रोड भी पहुंची लेकिन नियुक्ति पर विवाद के बाद अब इसे कानूनी जामा पहनाने की प्रक्रिया सरकार चलाएगी।

इस वजह से अधिसूचना की नहीं है कानूनी मान्यता

These are the reasons that LG prevented Swati  from office

राज निवास से आई चिट्ठी में स्पष्ट कहा गया है कि 17 जुलाई को उपराज्यपाल की स्वीकृति के बिना अधिसूचना जारी करके प्रक्रिया और नियम तोड़ा गया है। इसलिए इस अधिसूचना की कानूनी मान्यता नहीं है।


महिला आयोग की अध्यक्ष या सदस्य जो फैसले लेंगे या एक्शन लेंगे वो बेकार जाएंगे। इसलिए आपसे अनुरोध है कि उपराज्यपाल के समक्ष जितनी जल्दी हो सके मामला विचार के लिए भेजें।

राज निवास से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की करीबी और महिला आयोग की अध्यक्ष बनाई गई स्वाति की नियुक्ति को गैर कानूनी बताए जाने पर तल्खी बढ़ती दिख रही है। दिल्ली सरकार सीधे तौर पर खुलकर अभी कुछ नहीं बोल रही है लेकिन आम आदमी पार्टी के नेताओं ने हमले शुरू कर दिए हैं।

वहीं परिवहन मंत्री गोपाल राय ने कहा है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार ने जो फैसला लिया है कानून व संविधान के दायरे में लिया है। अगर किसी को कोई दिक्कत होगी तो उसके तहत बात करेंगे। एलजी साहब ने जो आज कहा है कुछ नया नहीं है। ये सिलसिला पुराना है। सरकार के काम करने का सिलसिला भी अब उसी तरह पुराना हो गया।

नियुक्ति में लिखा गया उपराज्यपाल के आदेश से

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दिल्ली सरकार में जो भी अधिसूचनाएं हो रही हैं, उसकी स्वीकृति उपराज्यपाल से बेशक नहीं ली जा रही है लेकिन संबंधित विभाग के सचिव या प्रमुख हस्ताक्षर से ऊपर,‘उपराज्यपाल के आदेश से और उनके नाम पर’लिखा होता है।


वैट, आबकारी, मनोरंजन के साथ-साथ तमाम अधिसूचनाएं बिना उपराज्यपाल की स्वीकृति के उनके नाम से निकाली गई हैं। यह जानकारी राजनिवास और दिल्ली सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने दी है। इसे न्यायालय की अवमानना के तौर पर भी सामने रखे की तैयारी है।

महिला आयोग के अध्यक्ष की स्वाति मालीवाल की नियुक्ति और महिला आयोग के पुनर्गठन की अधिसूचना में स्वीकृति लिए बिना, उपराज्यपाल के आदेश से और उनके नाम पर लिखा गया है।

ये भी बिना राज्यपाल के जारी कर दी गईं अधिसूचनाएं

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राजनिवास ने इस मामले में सीधे तौर पर प्रधान समाज कल्याण सचिव से ऐसा लिखे जाने के पीछे में तथ्य और हालात की जानकारी मांगी है।

इस मामले में राजनिवास और दिल्ली सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने माना है कि ऐसा हो रहा है,जो गलत है। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली की आबकारी नीति, मनोरंजन कर, केबल टीवी कर, डीजल-पेट्रोल पर वैट वृद्धि समेत तमाम ऐसे मामले हैं जिनकी अधिसूचना बिना उपराज्यपाल की स्वीकृति के जारी की गई है।


जबकि अधिसूचना में ‘उपराज्यपाल के आदेश से और उनके नाम पर’ लिखा होता है। उसके ठीक नीचे ही संबंधित विभाग के प्रमुख का नाम होता है।

अधिसूचना को अवैध करने की आ सकती है सूचना

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सूत्र बताते हैं कि चाहे स्वाति मालीवाल की नियुक्ति का मामला हो या फिर अन्य अधिसूचनाओं के लिए उपराज्यपाल से नियुक्ति नहीं लेने का, सभी मामलों में संबंधित मंत्री ने उपराज्यपाल से स्वीकृति नहीं लेने का जस्टीफिकेशन दिया है।


उसके बाद ही अधिकारियों ने अधिसूचना जारी की है। बताते हैं कि 8 अगस्त को उपराज्यपाल की शक्ति वाले मामले की कोर्ट में सुनवाई है। उसमें इसे न्यायालय अवमानना के तौर पर पेश किया जा सकता है।

वहीं अधिसूचना को अवैध करार देने की याचिकाएं भी सामने आ सकती हैं।

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