{"_id":"6aa5381e59d8388aa3043b75","slug":"doors-of-several-delhi-heritage-sites-closed-due-to-conservation-work-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-154617-2026-09-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: संरक्षण कार्यों के बीच दिल्ली की कई धरोहरों के दरवाजे बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: संरक्षण कार्यों के बीच दिल्ली की कई धरोहरों के दरवाजे बंद
विज्ञापन
आरटीआई में सामने आई जानकारी
एएसआई के 10 स्मारकों में संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं से जुड़े काम जारी
हौज खास, जंतर-मंतर, अग्रसेन की बावली और लाल किले की कई इमारतों में प्रवेश प्रतिबंधित
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से संरक्षण, मरम्मत और पर्यटक सुविधाओं से जुड़े कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों के चलते राजधानी के कई प्रमुख स्मारकों में पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हौज खास, जंतर-मंतर और अग्रसेन की बावली समेत कई धरोहरों के कुछ हिस्सों में प्रवेश रोक दिया गया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब में सामने आया है कि दिल्ली के 10 स्मारकों में अलग-अलग प्रकार के संरक्षण कार्य चल रहे हैं।
आरटीआई के मुताबिक हौज खास और कोटला फिरोज शाह परिसर में संरचनात्मक मरम्मत का काम चल रहा है। तुगलकाबाद किले और गयासुद्दीन तुगलक के मकबरे में पर्यटक सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है। कुतुब मीनार परिसर में भी आगंतुकों की सुविधा से जुड़े सुधार कार्य जारी हैं। सलीमगढ़ किले में सिग्नल रेजिमेंट बिल्डिंग और शौचालय ब्लॉक की मरम्मत-नवीनीकरण तथा लाल किले के लाहौर गेट पर पैरापेट सहित कुएं वाले क्षेत्र का संरक्षण किया जा रहा है।
हौज खास परिसर की कुछ इमारतों में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित है। यह परिसर एक मध्यकालीन जलाशय के आसपास विकसित हुआ था। बाद में यहां मदरसा, मकबरा और अन्य इमारतों का निर्माण हुआ। जलाशय का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में हुआ, जबकि परिसर की कई बाद की इमारतें फिरोज शाह तुगलक के दौर की हैं। मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर और अग्रसेन की बावली में भी पर्यटकों की आवाजाही प्रतिबंधित है। आरटीआई जवाब में इन पाबंदियों की शुरुआत की तारीख स्पष्ट नहीं की गई है। जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1724 में जंतर-मंतर का निर्माण कराया था। यह अपने विशाल पत्थर के खगोलीय उपकरणों के लिए प्रसिद्ध है।
विज्ञापन
लाल किले की छह इमारतें पर्यटकों से दूर
लाल किले के हमाम, मोती मस्जिद, दीवान-ए-खास, खास महल, रंग महल और शीश महल में भी प्रवेश प्रतिबंधित है। ये सभी मुगलकालीन स्थापत्य के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। हमाम शाही स्नानघर था, जबकि मोती मस्जिद औरंगजेब ने निजी उपयोग के लिए बनवाई थी। दीवान-ए-खास शाही मुलाकातों का प्रमुख स्थल था। खास महल और रंग महल शाही आवासीय परिसर का हिस्सा थे। हमाम और मोती मस्जिद लंबे समय से बंद हैं। नाजुक संगमरमर की कारीगरी और नक्काशी को भीड़ से नुकसान की आशंका के कारण यहां प्रवेश सीमित किया गया है।
कुतुब मीनार के अंदरूनी हिस्से में भी प्रवेश बंद
कुतुब मीनार परिसर में हिंदू अवशेष कॉरिडोर की पहली मंजिल, जमाली-कमाली का मकबरा और मीनार का अंदरूनी हिस्सा पर्यटकों के लिए बंद है। कुतुब मीनार के भीतर प्रवेश 1981 की भगदड़ के बाद बंद किया गया था। सफदरजंग के मकबरे में मस्जिद और उससे जुड़ी कोठरियों की मरम्मत, जबकि हुमायूं के मकबरे में पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम जारी है।
पांच साल में 132 करोड़ से ज्यादा खर्च
वित्तीय वर्ष आवंटन खर्च
2021-22 19.10 करोड़ लगभग 19.10 करोड़
2022-23 30.50 करोड़ लगभग 30.50 करोड़
2023-24 36.61 करोड़ लगभग 36.57 करोड़
2024-25 17.85 करोड़ लगभग 17.85 करोड़
2025-26 28.70 करोड़ लगभग 28.67 करोड़
आरटीआई के जवाब में दिल्ली सर्किल को संरक्षण और संबंधित कार्यों के लिए पिछले पांच वित्तीय वर्षों में किए गए आवंटन और खर्च का भी ब्योरा दिया गया है। पांच वर्षों में करीब 132.76 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, जबकि लगभग 132.69 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
-- -
विज्ञापन
एएसआई के 10 स्मारकों में संरक्षण और पर्यटक सुविधाओं से जुड़े काम जारी
हौज खास, जंतर-मंतर, अग्रसेन की बावली और लाल किले की कई इमारतों में प्रवेश प्रतिबंधित
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों को संवारने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की ओर से संरक्षण, मरम्मत और पर्यटक सुविधाओं से जुड़े कार्य कराए जा रहे हैं। इन कार्यों के चलते राजधानी के कई प्रमुख स्मारकों में पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हौज खास, जंतर-मंतर और अग्रसेन की बावली समेत कई धरोहरों के कुछ हिस्सों में प्रवेश रोक दिया गया है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब में सामने आया है कि दिल्ली के 10 स्मारकों में अलग-अलग प्रकार के संरक्षण कार्य चल रहे हैं।
आरटीआई के मुताबिक हौज खास और कोटला फिरोज शाह परिसर में संरचनात्मक मरम्मत का काम चल रहा है। तुगलकाबाद किले और गयासुद्दीन तुगलक के मकबरे में पर्यटक सुविधाओं को बेहतर किया जा रहा है। कुतुब मीनार परिसर में भी आगंतुकों की सुविधा से जुड़े सुधार कार्य जारी हैं। सलीमगढ़ किले में सिग्नल रेजिमेंट बिल्डिंग और शौचालय ब्लॉक की मरम्मत-नवीनीकरण तथा लाल किले के लाहौर गेट पर पैरापेट सहित कुएं वाले क्षेत्र का संरक्षण किया जा रहा है।
विज्ञापन
हौज खास परिसर की कुछ इमारतों में पर्यटकों का प्रवेश प्रतिबंधित है। यह परिसर एक मध्यकालीन जलाशय के आसपास विकसित हुआ था। बाद में यहां मदरसा, मकबरा और अन्य इमारतों का निर्माण हुआ। जलाशय का निर्माण अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में हुआ, जबकि परिसर की कई बाद की इमारतें फिरोज शाह तुगलक के दौर की हैं। मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर और अग्रसेन की बावली में भी पर्यटकों की आवाजाही प्रतिबंधित है। आरटीआई जवाब में इन पाबंदियों की शुरुआत की तारीख स्पष्ट नहीं की गई है। जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1724 में जंतर-मंतर का निर्माण कराया था। यह अपने विशाल पत्थर के खगोलीय उपकरणों के लिए प्रसिद्ध है।
विज्ञापन
लाल किले की छह इमारतें पर्यटकों से दूर
लाल किले के हमाम, मोती मस्जिद, दीवान-ए-खास, खास महल, रंग महल और शीश महल में भी प्रवेश प्रतिबंधित है। ये सभी मुगलकालीन स्थापत्य के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। हमाम शाही स्नानघर था, जबकि मोती मस्जिद औरंगजेब ने निजी उपयोग के लिए बनवाई थी। दीवान-ए-खास शाही मुलाकातों का प्रमुख स्थल था। खास महल और रंग महल शाही आवासीय परिसर का हिस्सा थे। हमाम और मोती मस्जिद लंबे समय से बंद हैं। नाजुक संगमरमर की कारीगरी और नक्काशी को भीड़ से नुकसान की आशंका के कारण यहां प्रवेश सीमित किया गया है।
कुतुब मीनार के अंदरूनी हिस्से में भी प्रवेश बंद
कुतुब मीनार परिसर में हिंदू अवशेष कॉरिडोर की पहली मंजिल, जमाली-कमाली का मकबरा और मीनार का अंदरूनी हिस्सा पर्यटकों के लिए बंद है। कुतुब मीनार के भीतर प्रवेश 1981 की भगदड़ के बाद बंद किया गया था। सफदरजंग के मकबरे में मस्जिद और उससे जुड़ी कोठरियों की मरम्मत, जबकि हुमायूं के मकबरे में पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम जारी है।
पांच साल में 132 करोड़ से ज्यादा खर्च
वित्तीय वर्ष आवंटन खर्च
2021-22 19.10 करोड़ लगभग 19.10 करोड़
2022-23 30.50 करोड़ लगभग 30.50 करोड़
2023-24 36.61 करोड़ लगभग 36.57 करोड़
2024-25 17.85 करोड़ लगभग 17.85 करोड़
2025-26 28.70 करोड़ लगभग 28.67 करोड़
आरटीआई के जवाब में दिल्ली सर्किल को संरक्षण और संबंधित कार्यों के लिए पिछले पांच वित्तीय वर्षों में किए गए आवंटन और खर्च का भी ब्योरा दिया गया है। पांच वर्षों में करीब 132.76 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ, जबकि लगभग 132.69 करोड़ रुपये खर्च किए गए।