फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The work of removing garbage mountains will begin from October 1

कूड़े के पहाड़ हटाने का काम एक अक्तूबर से होगा शुरू

Mon, 23 Sep 2019 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 23 Sep 2019 05:22 AM IST
विज्ञापन
The work of removing garbage mountains will begin from October 1
ngt - फोटो : ngt

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर दिल्ली की तीनों लैंडफिल साइट्स से कचरा हटाने में सभी नौ फर्म एक अक्तूबर से जुट जाएंगी।गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट्स पर एकत्रित करीब 2.8 करोड़ टन कचरे और मलबे को फेंकने के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। इस वजह से शुरुआती दौर में कचरे को अलग अलग किया जाएगा। 

विज्ञापन


इस कचरे की वजह से आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सेहत पर पड़ रहे असर को देखते हुए एनजीटी ने इसे हटाने के निर्देश दिए गए हैं। 

सबसे ज्यादा कूड़ा गाजीपुर में 
तीनों लैंडफिल साइट्स में सर्वाधिक 140 लाख टन कचरा गाजीपुर में इकट्ठा हो चुका है। उत्तरी दिल्ली के भलस्वा में लैंडफिल साइट पर 85-90 लाख टन जबकि ओखला से 55 लाख टन कचरा एकत्रित है। 
विज्ञापन


निस्तारण हर माह 55 लाख रुपये होंगे खर्च
तीनों लैंडफिल साइट के लिए जारी टेंडर के बाद नौ फर्म को कूड़े को अलग-अलग करने सहित सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। कचरे को अलग अलग करने के लिए ट्रॉमल (मशीन) का उपयोग किया जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


माना जा रहा है कि तीनों साइट्स के लिए कुल नौ मशीनें चाहिए। कर्मियों सहित एक मशीन पर प्रतिमाह करीब 6.29 लाख रुपये का खर्च आएगा। यदि नौ मशीनों का प्रयोग होता है तो कचरे को हटाने में प्रति माह करीब 55 लाख रुपये का खर्च आएगा। 

पुलिस कर्मियों की मौत के बाद दो थाने शिफ्ट करने की आग्रह 

पिछले छह साल में गाजीपुर थाने में तैनात दो पुलिसकर्मियों की फेंफड़ों के संक्रमण से मौत हो चुकी है। इसका हवाला देते हुए गाजीपुर और भलस्वा थानों को कम प्रदूषित क्षेत्रों में शिफ्ट करने का आला अधिकारियों से आग्रह किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक भौगोलिक कारणों और लोगों को पहुंचने में होने वाली परेशानियों की वजह से थानों को कहीं और शिफ्ट करने के लिए जमीन नहीं दी जा सकती है। वहीं डॉक्टरों ने लैंडफिल की वजह से फेंफड़ों की बीमारी होने से इंकार किया है।

एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर थाने के लिए जमीन पर विवाद होने की वजह से फिलहाल इसे शिफ्ट नहीं किया जा सका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जनवरी-अप्रैल के दौरान किए सर्वे के दौरान यहां पीएम-2.5 और पीएम-10 की मात्रा कई गुना अधिक पाई गई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed