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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   The winter session was marred by uproar for the second consecutive day, with accusations and counter-accusations preventing proceedings from progressing.

Delhi NCR News: चौथे दिन भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर, एक दिन के लिए और बढ़ा सदन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Jan 2026 07:53 PM IST
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-विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र एक दिन बढ़ाया, हंगामे की भेंट चढ़ा शीतकालीन सत्र
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-नेता प्रतिपक्ष की लगातार गैरहाजिरी पर स्पीकर सख्त, फोरेंसिक जांच के आदेश


-लगातार दूसरे दिन विधानसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई


अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में हंगामा थम नहीं रहा है। लगातार दूसरे दिन विधानसभा की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। बृहस्पतिवार सेशन का चौथा दिन आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी में उलझा रहा। इस बीच नेता प्रतिपक्ष आतिशी का लगातार दूसरे दिन सदन से गायब रहना विधानसभा अध्यक्ष को खटक गया। स्पीकर ने इसे गंभीर मानते हुए कड़े शब्दों में नाराजगी जताई और स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। हंगामे के बीच इस दौरान सदन को चार बार स्थगित करना पड़ा। हालात को देखते हुए अध्यक्ष ने सत्र को एक दिन बढ़ाने का फैसला किया, अब विधानसभा शुक्रवार को भी चलेगी।

शीतकालीन सत्र के चौथे दिन की शुरुआत से ही सदन में माहौल गर्म रहा। सत्ता पक्ष भाजपा और विपक्ष आम आदमी पार्टी के सदस्य एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे। दोनों ओर से नारेबाजी तेज थी और सदन की कार्यवाही चलाना मुश्किल रहा। हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को अपनी चेयर छोड़नी पड़ी। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत कराने और सदन की गरिमा बनाए रखने की कई कोशिशें कीं, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। नतीजतन करीब आधे घंटे तक कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ। जैसे ही सदस्य सदन में लौटे, वही आरोप-प्रत्यारोप और शोर-शराबा फिर शुरू हो गया। इस दौरान आम आदमी पार्टी ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि कला, संस्कृति और भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने नेता प्रतिपक्ष के कथित बयान में हेरफेर कर एक फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाया है। विपक्ष ने इसे सदन की मर्यादा के खिलाफ बताते हुए मंत्री की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग कर दी।
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विपक्ष के आरोप पर स्पीकर गंभीर, होगी फोरेंसिक जांच

नेता प्रतिपक्ष की ओर से गुरुओं के कथित अपमान से जुड़े वायरल वीडियो की सच्चाई पर सवाल उठाते हुए आम आदमी पार्टी ने इसकी जांच की मांग की। इस पर स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा सचिवालय को वीडियो की फोरेंसिक जांच कराने के निर्देश दिए। तय किया गया कि जांच रिपोर्ट 15 दिन के भीतर विधानसभा अध्यक्ष को सौंपी जाएगी, ताकि सच सामने आ सके। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष की सदन में कथित गुरुओं को अपमानित करने वाली टिप्पणी और सोशल मीडिया पर प्रसारित इसके विडियो की जांच विशेषाधिकार समिति को सौंपने का निर्णय लिया। एक अन्य ऐसे ही मामले में विधायक हरीश खुराना की शिकायत पर आप विधायक जरनैल सिंह के खिलाफ भी विशेषाधिकार समिति को जांच के निर्देश मिले हैं। आरोप है कि आप पार्टी के ये विधायक सोशल मीडिया पर स्पीकर के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।
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एक दिन के लिए बढ़ाया सत्र
दोपहर बाद अध्यक्ष ने सदन की स्थिति को देखते हुए शीतकालीन सत्र को एक दिन के लिए बढ़ाने की घोषणा की और सदन को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। अब विधानसभा शुक्रवार को भी बैठेगी। हालांकि सवाल यह है कि क्या उस दिन कोई सार्थक बहस हो पाएगी या फिर हंगामा ही हावी रहेगा। सत्र को बढ़ाने का प्रस्ताव मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिया था। अब तक के सत्र पर नजर डालें तो चार दिन करीब बेकार ही गए हैं। इस दौरान जनता के मुद्दों पर गंभीर चर्चा न के बराबर हुई है। दिल्ली के लोगों से जुड़े अहम सवाल, जैसे प्रदूषण, शिक्षा, प्रशासन और वित्त सदन में शोर की भेंट चढ़ते रहे। अभी तक सिर्फ कोर्ट फीस माफी संशोधन विधेयक ही पास हो सका है। इसके अलावा न तो कोई नई नीति बनी और न ही जनता की भलाई से जुड़ा कोई ठोस फैसला हो पाया। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को 2020 से 2025 तक की कैग रिपोर्ट सदन में पेश करनी थी। ये रिपोर्ट दिल्ली के वित्त, प्रशासन और शिक्षा जैसे अहम विषयों से जुड़ी है, लेकिन हंगामे के चलते यह भी पेश नहीं हो सकी। प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर सदन से भागने के आरोप लगाते नजर आए, लेकिन समाधान पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई।


शीतकाल में निराशा, नेता प्रतिपक्ष पर सवाल
इस घटनाक्रम के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी की गैरहाजिरी पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि लगातार दूसरे दिन सदन से गायब रहना हैरान करने वाला है। स्पीकर ने सवाल उठाया कि क्या वे विषय की गंभीरता को समझते हुए ऐसा कर रही हैं। उन्होंने संकेत दिए कि अगर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई तो कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है। इसी बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी। कुल मिलाकर शीतकालीन सत्र अब तक जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद नतीजा लगभग शून्य रहा। सदन का समय राजनीति की भेंट चढ़ गया और दिल्लीवासियों के असली मुद्दे पीछे छूटते चले गए। अब नजरें शुक्रवार की कार्यवाही पर टिकी हैं, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि हंगामे के बीच कोई सार्थक चर्चा हो पाएगी या नहीं।
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