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विदाई: दिल्ली की सियासत में शिबू सोरेन की मौजूदगी की अनकही कहानी, नगर निगम चुनाव में रचा इतिहास

Wed, 06 Aug 2025 01:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 06 Aug 2025 01:28 AM IST
सार

शिबू सोरेन एमसीडी चुनाव में इतिहास रच चुके हैं। झामुमो ने लगातार वर्ष 1997, 2002 और 2007 के चुनाव में विष्णु गार्डन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ख्याला और गुरु हरिकिशन नगर वार्ड से पार्षदों को विजयी बनाकर सभी को चौंका दिया था।

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The untold story of Shibu Soren's presence in Delhi politics
शिबू सोरेन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड की क्षेत्रीय पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का न तो दिल्ली में कोई संगठित ढांचा है और न ही बड़ा जनाधार। इसके बावजूद पार्टी प्रमुख शिबू सोरेन एमसीडी चुनाव में इतिहास रच चुके हैं। झामुमो ने लगातार वर्ष 1997, 2002 और 2007 के चुनाव में विष्णु गार्डन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ख्याला और गुरु हरिकिशन नगर वार्ड से पार्षदों को विजयी बनाकर सभी को चौंका दिया था।

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शिबू सोरेन ने वर्ष 1997 और 2002 में दिग्गज नेता दयानंद चंदेला और उनकी पत्नी धनवंती चंदेला को टिकट दिया था। पति-पत्नी ने झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की थी। दिल्ली के स्थानीय सामाजिक समीकरणों और मजबूत ग्रामीण जनसमर्थन के दम पर सोरेन ने साबित किया कि राष्ट्रीय पार्टियों के बिना भी क्षेत्रीय संगठन, यदि स्थानीय मुद्दों और जनभावनाओं से जुड़ा हो, तो वह चुनावी सफलता प्राप्त कर सकता है।
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उधर, वर्ष 2007 के एमसीडी चुनाव में चंदेला परिवार की अगली पीढ़ी ने भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाया। इस चुनाव में दयानंद चंदेला के बेटे मेघराज चंदेला और पुत्रवधू मीनाक्षी चंदेला ने झामुमो के ही टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद चंदेला परिवार कांग्रेस में चला गया और सोरेन ने भी दिल्ली में अन्य किसी नेता पर दांव नहीं लगाया। 
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दिलचस्प बात यह रही कि दिल्ली की राजनीति में शिबू सोरेन की पार्टी की यह सफलता सिर्फ चुनावों तक सीमित नहीं रही। वर्ष 1998 में जब भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा को हटाया तो इसके विरोध में दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में बड़े स्तर पर आंदोलन खड़ा हुआ था। उस समय झामुमो भी इस जन आंदोलन में खुलकर शामिल हुआ था।

वर्ष 1998 में विधानसभा चुनाव से पहले साहिब सिंह वर्मा के पैतृक गांव मुंडका के पास घेवरा मोड़ स्थित वर्तमान में उनकी समाधि स्थल पर सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत का आयोजन हुआ था, जिसमें झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन स्वयं पहुंचे थे। उन्होंने ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन देते हुए दिल्ली की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। 


इस मौके पर उन्होंने दिल्ली के ग्रामीण समाज को आश्वासन दिया था कि उनकी पार्टी हमेशा उनके हक और अधिकार की लड़ाई में साथ खड़ी रहेगी। इस तरह, एक क्षेत्रीय पार्टी होते हुए भी झामुमो ने दिल्ली के शहरी-ग्रामीण सीमा पर बसे इलाकों में अपनी पकड़ स्थापित की थी।
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