बाघ के हमले में मकसूद की मौत के लिए चिड़ियाघर प्रशासन जिम्मेदार
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हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में राजधानी के चिड़ियाघर में सफेद बाघ द्वारा एक युवक को मारने के मामले में सुरक्षा संबंधी लापरवाही बरतने पर राष्ट्रीय प्राणी उद्यान को जिम्मेदार ठहराया है।
अदालत ने कहा कि चिड़ियाघर में यह जानते हुए कि बाडे़ में एक खतरनाक जानवर है, उसके बावजूद वहां चढ़ने से किसी को रोकने के लिए पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई।मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने मृतक मकसूद के आश्रितों को छह लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
इस राशि में से पहले ही एक लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। गौरतलब है कि 22 वर्षीय मकसूद 23 सितंबर 2014 को बाघ के बाड़े में कूद गया था और बाघ ने उसकी जान ले ली थी।
मानवता के आधार पर एक लाख रुपये देने का तर्क खारिज
अदालत ने चिड़ियाघर प्रशासन व केंद्र सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया कि इस मामले में उनकी कोई लापरवाही नहीं है और उन्होंने एक लाख रुपये भी मानवता के आधार पर परिवार को दिए हैं। अदालत ने कहा कि वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 और अन्य नियमों के तहत चिड़ियाघर की वैधानिक कर्तव्यों को निभाने की ड्यूटी है।
खंडपीठ ने कहा कि हमारी राय में बाडे़ के आसपास आगंतुक की सावधानी के लिए कोई ऊंची बाधा नहीं लगाई गई। अदालत ने कहा कि जब मकसूद बाडे़ में गिरा उसे बचाने के लिए रस्सी की सीढ़ी मदद के रूप में गिराई जा सकती थी ताकि वह दीवार पर चढ़ सके, लेकिन वहां रस्सी उपलब्ध नहीं थी।
अदालत ने कहा कि चिड़ियाघर में किसी को चोट या मौत के लिए वह पूरी तरह से जिम्मेदार है। मकसूद की दुर्भाग्यपूर्ण मौत से उसकी पत्नी को नुकसान
हुआ है।
याचिका में मकसूद की पत्नी ने 50 लाख रुपये का मुआवजा मांगा था। उसका तर्क था कि परिवार में मकसूद ही एक मात्र कमाने वाला सदस्य था। ऐसे में सुरक्षा लापरवाही के लिए चिड़ियाघर मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार है।