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खुलासा: कारों से ज्यादा बाइक फैलाती है प्रदूषण

Thu, 07 Jan 2016 08:40 PM IST
Updated Thu, 07 Jan 2016 08:40 PM IST
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The research revealed: pollution spreads by bikes more than cars

दिल्ली सरकार बेशक सड़कों से कारों को हटाकर शहर की आबोहवा साफ करने की कोशिश में है, लेकिन कारों से ज्यादा डीजल के भारी वाहन हवा को गंदा कर रहे हैं।

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इसके बाद नंबर बाइक का आता है। डीजल व पेट्रोल की कारों को मिलाकर उतना प्रदूषण नहीं होता, जितना बाइक फैलाती है। इसका खुलासा द एनर्जी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (टेरी) व यूनिवर्सिटी ऑफ कैलीफोर्निया के एक अध्ययन से हुआ है।
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पिछले दिनों जारी रिपोर्ट न सिर्फ वाहनों से होने वाले प्रदूषण का आकलन करती है, बल्कि इसमें ईंधन की गुणवत्ता का भी अध्ययन किया गया है। इसके अलावा राजधानी में मुसाफिरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों का आंकड़ा इसमें शामिल है।

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मौसमी दशाओं का भी ध्यान देना पड़ता है

The research revealed: pollution spreads by bikes more than cars

रिपोर्ट के मुताबिक, डीजल के भारी वाहनों से सबसे ज्यादा नाइट्रोजन का ऑक्साइड व निलंबित कण (पीएम) निकलता है। दोनों की मात्रा क्रमश: 9 ग्राम/किमी व .5 ग्राम/किमी रहती है।


वहीं, दो स्ट्रोक इंजन वाली बाइक से .11 ग्राम/किमी नॉक्स व .1 ग्राम/किमी पीएम निकलता है, जबकि डीजल व पेट्रोल की कार से 2 ग्राम/किमी नॉक्स व .09 ग्राम/किमी पीएम निकलता है।

अध्ययन से जुड़े सुमित शर्मा बताते हैं कि स्थान विशेष पर पर्यावरण प्रदूषण का वास्तविक स्तर जानने के लिए वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण के साथ मौसमी दशाओं का भी ध्यान देना पड़ता है।

फॉर्मूला लागू नहीं होता तो आबोहवा ज्यादा खराब होती

The research revealed: pollution spreads by bikes more than cars

मसलन, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल कमेटी के चार रीयल टाइम मॉनिटरिंग स्टेशनों पर एक से पांच जनवरी के बीच कमोवेश प्रदूषण का स्तर बढ़ता, लेकिन बुधवार को हवा की रफ्तार बढ़ने से इसमें मामूली कमी दर्ज की गई।


इसके साथ ही तापमान के इजाफे का भी असर पड़ा है। सुमित शर्मा मानते हैं कि अगर दिल्ली में सम-विषम फॉर्मूला लागू नहीं होता तो आबोहवा थोड़ी ज्यादा खराब होती।

रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में करीब 55 फीसदी लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, अलग-अलग माध्यमों से सफर करने वालों में करीब 72 फीसदी लोग साइकिल, पैदल व बस से चलते हैं।

ऐसे आएगी प्रदूषण में कमी

The research revealed: pollution spreads by bikes more than cars

इसमें बसों के मुसाफिर करीब 37 फीसदी हैं। अपनी कार से चलने वालों की संख्या बीस फीसदी है। बाकी आठ फीसदी लोग तिपहिया व टैक्सी में चलते हैं। खास बात यह है कि रिपोर्ट सार्वजनिक परिवहन के मुसाफिरों का आंकड़ा बढ़ने की संभावना पर भी विचार करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 32 फीसदी लोग असुविधाजनक होने, 30 फीसदी समय का खर्च ज्यादा होने, 28 फीसदी असुरक्षा व दस फीसदी सर्विस खराब होने से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल नहीं करते।

रिपोर्ट बताती है कि फिलहाल यूरो-तीन गुणवत्ता के ईंधन पर चल रहे भारी वाहनों में यूरो-पांच स्तर का ईंधन इस्तेमाल होते ही 87 फीसदी पीएम का उत्सर्जन घट जाएगा। वहीं, यूरो-चार पर चल रहे हल्के वाहनों का ईंधन यूरो-पांच की गुणवत्ता पर ले जाने से इसमें 80 फीसदी तक कमी आ जाएगी।

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