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सरकारी बंगले में रहेंगे अध्यक्ष, किराए पर उपाध्यक्ष

Sat, 06 Jun 2015 12:57 AM IST
संजय शिशौदिया/अमर उजाला, गाजियाबाद
संजय शिशौदिया/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Sat, 06 Jun 2015 12:57 AM IST
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The president will be in official residence, rental vice
जीडीए के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष आवास को लेकर आजकल विकास प्राधिकरण में चर्चा जोरों पर है। राधाकुंज वाले पुराने उपाध्यक्ष आवास पर जहां जीडीए अध्यक्ष संतोष यादव और उनका परिवार रह रहा है।
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वहीं हाल ही में नोएडा से ट्रांसफर होकर आए नवनियुक्त जीडीए वीसी विजय कुमार यादव के लिए राजनगर सेक्टर-5 में बंगला किराए पर लिया गया है।

करीब 40 हजार रुपये प्रतिमाह वाले इस बंगले को फिलहाल तैयार किया जा रहा है। अगले सप्ताह जीडीए वीसी इसमें शिफ्ट हो सकते हैं।

जीडीए अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के पद पर आसीन संतोष यादव पिछले कई वर्षों से राजनगर के राधाकुंज स्थित उपाध्यक्ष आवास पर रह रहे थे।

पिछले दिनों शासन ने संतोष यादव का ट्रांसफर उपाध्यक्ष पद से मुख्यमंत्री सचिव के पद पर कर दिया। जबकि जीडीए वीसी के रूप में विजय कुमार यादव की नियुक्ति कर दी गई।
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नए वीसी ने अपना कार्यभार भी संभाल लिया, मगर उन्हें आवास नहीं मिल सका। जानकारों का कहना है कि संतोष यादव का ट्रांसफर शासन ने उपाध्यक्ष पद से किया है, जबकि अध्यक्ष पद अभी भी उन्हीं के पास है।
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ऐसे में वहीं सरकारी बंगले में रहेंगे। कभी ‘उपाध्यक्ष आवास’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस सरकारी बंगले पर अब ‘अध्यक्ष आवास’ की प्लेट लगा दी गई है।

उधर नवनियुक्त जीडीए वीसी अभी अपने नोएडा स्थित आवास से ही आवागमन कर रहे हैं, मगर इसमें आने-जाने में ही काफी समय लग जाता है। कई बार वह जाम में भी फंस चुके हैं।

इसी के चलते उनके लिए अब राजनगर सेक्टर-5 में एक खाली पड़ी कोठी को किराए पर लिया गया है। कोठी में फिलहाल काम चल रहा है।

जीडीए वीसी विजय कुमार यादव का कहना है कि काम पूरा होने के बाद वह अपने नए किराए के आवास में शिफ्ट करेंगे।

चर्चाओं में नियमों पर भी मंथन:
आवास को लेकर चर्चाओं में नियमों पर भी मंथन शुरू हो गया है। अलग-अलग लोग अपने तरीके से नियमों का तर्क देते हैं

तर्क नंबर 1
जीडीए उपाध्यक्ष बनने के दौरान संतोष यादव सीनियर आईएएस थे। इसी के चलते प्राधिकरण का अध्यक्ष कमिश्नर को न बनाकर उन्हें ही बनाया गया। अब चूंकि मंडल कमिश्नर संतोष यादव से सीनियर आईएएस हैं, लिहाजा उपाध्यक्ष पद से हटने के बाद अध्यक्ष की शक्तियां स्वयं ही कमिश्नर के पास चली जानी चाहिए।

तर्क नंबर 2
सीनियर-जूनियर का कोई मतलब नहीं होता है। शासन के विवेक और पावर नियुक्ति तय होती हैं। शासन चाहे तो कमिश्नर को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाए या फिर अलग से किसी अन्य आईएएस को।


तर्क नंबर 3
बंगले का नोटिफिकेशन होता है। जिस पर डीएम आवास पर सिर्फ डीएम और एसएसपी आवास पर सिर्फ एसएसपी रहते हैं। उसी प्रकार प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आवास पर उपाध्यक्ष को ही रहना चाहिए। हालांकि यह भी तय नहीं है कि उपाध्यक्ष आवास का पदनाम से नोटिफिकेशन है या नहीं।
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