इस शहर में बढ़ता ही जा रहा है कुत्तों का आतंक, जानें अगर काट ले कुत्ता तो क्या करना चाहिए..
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इस शहर में दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है कुत्तों का आतंक..
औद्योगिक नगरी के लोग आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों से रोजाना 70 से 80 लोग कुत्ते के काटने पर बीके सिविल अस्पताल में इलाज करवाने आते हैं।
बच्चों के साथ बड़े भी कुत्ते के आतंक से परेशान हैं। मगर नगर निगम के पास आवारा कुत्तों से निपटने के लिए कोई योजना नहीं है। यहां तक की कुत्तों के बधियाकरण पर निर्णय लेने वाली कमेटी का भी आज तक गठन नहीं हुआ है।
गांव अनंगपुर में गत शुक्रवार को एक महिला की पड़ोसी के कुत्ते के काटने से मौत हो गई थी।
इन क्षेत्रों से आते हैं अधिक मामले
शहर के अधिकांश क्षेत्रों में आवारा कुत्तों का आतंक है। सरकारी अस्पताल में कुत्ते काटे जाने के सबसे ज्यादा मामले एनआईटी, डबुआ कालोनी, जवाहर कालोनी, संजय गांधी मेमोरियल नगर, मेवला महाराजपुर, अनंगपुर, लकड़पुर आदि क्षेत्रों से आते हैं।
सरकारी अस्पताल में गरीब रेखा से नीचे जीवन यापन (बीपीएल) करने वाले लोगों को निशुल्क इलाज दिया जाता है। गरीबों को रैबीज का इंजेक्शन निशुल्क लगाया जाता है। कुत्ते काटे जाने पर डॉक्टर की सलाह से आमतौर पर पांच टीके रैबीज के लगाए जाते हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
-अगर कभी कुत्ता काट ले तो अपनी मर्जी से दवा न लें। जिस जगह जख्म हुआ है, वहां मिर्च न लगाएं, इससे संक्रमण बढ़ सकता है।
-जिस जगह जख्म हुआ है, उसे बहते हुए पानी से धो लें।
-जख्म गहरा है तो अपनी मर्जी से टांके न लगाएं। चिकित्सक से सलाह करके ही इलाज कराएं।
-अस्पताल आकर व्यवस्थित ढंग से इलाज शुरू करें, ताकि समय रहते बड़ी परेशानी से बचा जा सके।
-कई बार लापरवाही बरतना भारी पड़ जाता है।
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आवारा कुत्तों को पकड़ने की इजाजत नहीं है। इनके बधियाकरण के लिए एक एनजीओ को ठेका दिया गया है। मगर बधियाकरण पर निर्णय लेने वाली कमेटी का अभी गठन नहीं हुआ है। इसके लिए बैठक बुलाई गई थी, किसी कारणवश वो हो नहीं सकी। जल्द ही बैठक बुलाकर कमेटी का गठन किया जाएगा। - सुमन बाला, महापौर