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एक्सप्रेसवे हादसे का दर्द: सभी सुविधा वाला सरकारी अस्पताल हो तो बने बात

Mon, 11 Apr 2016 05:36 AM IST
सुशील पांडेय/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
सुशील पांडेय/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Mon, 11 Apr 2016 05:36 AM IST
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the pain of the tragedy: the facility's hospital remained so
एक्सप्रेसवे

नोएडा-ग्रेनो व यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे में घायलों के इलाज के लिए पास में ही आईसीयू और ट्रामा सेंटर के साथ सारी सुविधाओं वाला सरकारी अस्पताल होना चाहिए। पुलिस को भी एक्सप्रेसवे पर घायलों की जान बचाने के लिए 24 घंटे अलर्ट रहना होगा, तभी घायल की मदद की जा सकेगी।

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विशेषज्ञों का कहना है कि प्राधिकरण की ओर से घायलों की मदद को दी जा रही सुविधाओं में दूसरी अन्य सुविधाएं जोड़ने के लिए फिर से सोचना होगा। घायलों को प्राइवेट अस्पताल में दाखिला दिलाने के बाद मनमाने चार्ज से बचाने के लिए प्रशासन को एक तंत्र विकसित करना होगा, ताकि मरीज और उनके परिजनों को परेशानी से बचाया जा सके।
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हादसे के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाने के समय को भी कम करने की दिशा में काम करने की जरूरत है। अगर ऐसा हो पाया तो हादसे में घायल हुए व्यक्ति की जान नहीं जाएगी और मौत का आंकड़ा भी कम हो पाएगा।
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सड़क हादसों में कमी लाने के लिए रोड सेफ्टी पर भी प्रशासन को काम करना होगा। इसमें ट्रैफिक पुलिस की ओर से एक्सप्रेसवे पर दौड़ने वाले वाहनों के चालकों को सुरक्षा के बाबत जागरूक करना होगा। साथ ही, हादसों को कम करने के लिए जरूरी कवायद करनी होगी

एक्सप्रेसवे पर दी जाने वाली सुविधाएं
- दो एंबुलेंस, चार ईको मोबाइल वैन, दो क्रेन
- यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर, मथुरा और आगरा टोल प्लाजा पर एंबुलेंस और मोबाइल वैन

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