चौंकिए मत! दिल्ली वालों को देना होगा ये नया टैक्स
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने दिल्ली और यमुना की सेहत सुधारने के लिए शुक्रवार को एक बड़ा फैसला किया। राष्ट्रीय राजधानी के हर घर को सीवर के लिए प्रति माह कम से कम सौ रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति देनी होगी।
यह राशि संपत्ति कर और पानी के बिल में से जो भी अधिक होगा, उसके अनुपात में ली जाएगी। जो लोग पानी का बिल नहीं भरते हैं या अनधिकृत कालोनियों में रहते हैं, उन्हें सौ से पांच एक सौ रुपये के बीच में क्षतिपूर्ति देनी पड़ेगी।
एनजीटी अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार की अगुवाई वाली बेंच ने दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड, सभी नगर निगमों, छावनी बोर्ड और बिजली कंपनियों समेत सभी नागरिक प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे घरों से क्षतिपूर्ति वसूलें।
इससे फर्क नहीं पड़ता है कि घर में सीवर का कनेक्शन है या नहीं। क्षतिपूर्ति का फैसला उस प्लॉट पर हुए निर्माण से संबंध रखने वाला विभाग करेगा।
दिल्ली सरकार को जाएगा टैक्स
क्षतिपूर्ति की राशि बिजली के बिल, पानी बिल और संपत्ति कर में जोड़कर दी जा सकती है। यह तय करने का अधिकार उस विभाग को दिया गया है, जो दिल्ली सरकार के पास यह राशि जमा कराएगा।
यह राशि दिल्ली सरकार के पास जमा होगी।एनजीटी ने ‘मैली से निर्मल यमुना’ पुनरुद्धार योजना, 2017 में लेट लतीफी पर भी कड़ा रुख अपनाया।
न्यायाधिकरण ने दिल्ली जल बोर्ड को एक हफ्ते के भीतर योजना के पहले चरण का एक्शन प्लान और समय सीमा देने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने कहा कि बोर्ड समय सीमा के भीतर एक्शन प्लान बना ले और 45 दिनों में टेंडर मंगा लिए जाए।
इस मामले में और समय नहीं दिया जाएगा। यदि इसमें देर होती है तो सक्षम अधिकारी व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार होंगे।